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Jai Ambe Gauri (जय अम्बे गौरी)

By Anuradha Paudwal (अनुराधा पौडवाल)


जय अम्बे गौरी आरती – अनुराधा पौडवाल | Jai Ambe Gauri Lyrics & Meaning

जय अम्बे गौरी आरती: लिरिक्स और अर्थ

कलाकार: अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal) | शैली: भक्ति संगीत

यह पृष्ठ प्रसिद्ध दुर्गा आरती ‘जय अम्बे गौरी’ को समर्पित है। यहाँ आप इसके हिंदी लिरिक्स, रोमन लिप्यंतरण, और इसके गहरे अर्थ को पढ़ सकते हैं।

🎵 जय अम्बे गौरी लिरिक्स (Hindi Lyrics)

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ मांग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दो नैना, चन्द्रवदन नीको॥ कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥ केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥ कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चन्द्र दिवाकर, राजत सम ज्योति॥ शुम्भ-निशुम्भ विदारे, महिषासुर घाती। धूम्रविलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥ चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे। मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥ ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी। आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥ चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों। बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥ तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता। भक्तन की दुख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥ भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी। मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥ कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥ श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावे॥

📖 Romanized Lyrics

Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri. Tumko Nishidin Dhyavat, Hari Brahma Shivri. Mang Sindoor Virajat, Tiko Mrigmad Ko. Ujjwal Se Do Naina, Chandravadan Neeko. Kanak Saman Kalevar, Raktambar Raje. Raktapushp Gal Mala, Kanthan Par Saje. Kehari Vahan Rajat, Khadg Khappar Dhari. Sur-Nar-Munijan Sevat, Tinke Dukhhari. Kanan Kundal Shobhit, Nasagre Moti. Kotik Chandra Divaker, Rajat Sam Jyoti. Shumbh-Nishumbh Vidare, Mahishasur Ghati. Dhumravilochan Naina, Nishadin Madmati. Chand-Mund Sanhare, Shonit Beej Hare. Madhu-Kaitabh Dou Mare, Sur Bhayheen Kare. Brahmani, Rudrani, Tum Kamala Rani. Agam Nigam Bakhani, Tum Shiv Patrani. Chausath Yogini Mangal Gavat, Nritya Karat Bhairon. Bajat Tal Mridanga, Aru Bajat Damru. Tum Hi Jag Ki Mata, Tum Hi Ho Bharta. Bhaktan Ki Dukh Harta, Sukh Sampatti Karta. Bhuja Char Ati Shobhit, Varamudra Dhari. Manvanchhit Phal Pavat, Sevat Nar Nari. Kanchan Thal Virajat, Agar Kapoor Bati. Shrimalketu Mein Rajat, Koti Ratan Jyoti. Shri Ambeji Ki Aarti, Jo Koi Nar Gave. Kahat Shivanand Swami, Sukh-Sampatti Pave.

🕉️ आरती का इतिहास (History)

यह आरती ‘जय अम्बे गौरी’ हिंदू धर्म में देवी दुर्गा की उपासना का एक प्रधान अंग है। सदियों से मंदिरों और घरों में, विशेषकर नवरात्रि के पावन पर्व पर इसे गाया जाता है। आरती के रचयिता के रूप में ‘शिवानन्द स्वामी’ का नाम आता है, जैसा कि अंतिम छंद में उल्लेखित है। अनुराधा पौडवाल, जिन्हें भक्ति संगीत की सम्राज्ञी माना जाता है, ने इसे अपनी सुरीली आवाज देकर अमर कर दिया है। 90 के दशक में टी-सीरीज (T-Series) द्वारा जारी किए गए भक्ति एल्बमों के माध्यम से यह संस्करण अत्यंत लोकप्रिय हुआ।

ℹ️ गीत के बारे में (About)

यह आरती माँ दुर्गा की महिमा, उनके रूप और उनकी शक्तियों का वर्णन करती है। अनुराधा पौडवाल का गायन अत्यंत भावपूर्ण और स्पष्ट है, जो श्रोता को भक्ति रस में सराबोर कर देता है। इसमें देवी के सौम्य रूप (गौरी) और संहारक रूप (महिषासुर मर्दिनी) दोनों का संतुलन है। वाद्य यंत्रों में पारंपरिक घंटियों, मृदंग और शंख का उपयोग इसे एक पूर्ण धार्मिक अनुभव बनाता है।

🧐 भावार्थ (Meaning Analysis)

  • दिव्य स्वरूप: आरती की शुरुआत में माता के सुंदर रूप का वर्णन है—स्वर्ण समान शरीर (कनक समान कलेवर), लाल वस्त्र (रक्ताम्बर), और गले में लाल फूलों की माला।
  • असुर संहारक: मध्य भाग में माता की वीरता का गान है। उन्होंने शुम्भ-निशुम्भ, महिषासुर, चण्ड-मुण्ड, और मधु-कैटभ जैसे भयानक राक्षसों का वध करके देवताओं को भयमुक्त किया।
  • त्रिशक्ति: माता को ब्रह्माणी (सरस्वती), रुद्राणी (पार्वती) और कमला रानी (लक्ष्मी) के रूप में संबोधित किया गया है, जो दर्शाता है कि वे ही सर्वोच्च शक्ति हैं।
  • फलश्रुति: अंत में, आरती करने का फल बताया गया है—सुख और संपत्ति की प्राप्ति। यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि मनवांछित फल पाने की प्रार्थना है।

💡 रोचक तथ्य (Trivia)

  • रचनाकार: आरती की अंतिम पंक्ति “कहत शिवानन्द स्वामी” से पता चलता है कि इसके मूल रचयिता स्वामी शिवानन्द थे।
  • लोकप्रियता: उत्तर भारत में शायद ही कोई ऐसा दुर्गा मंदिर हो जहाँ सुबह-शाम यह आरती न गाई जाती हो।
  • धुन: इस आरती की गायन शैली और मीटर (meter) प्रसिद्ध आरती “ओम जय जगदीश हरे” के समान है।
  • योगिनी: “चौंसठ योगिनी” का संदर्भ तांत्रिक परंपराओं से जुड़ा है, जो देवी की 64 सहचरियों को दर्शाता है।

अम्बे तू है जगदम्बे काली – Ambe Tu Hai Jagdambe Kali

अम्बे तू है जगदम्बे काली जय दुर्गे खप्पर वाली।
तेरे ही गुण गाएं भारती।
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती।

तेरे भक्त जनों पे माता पीर पड़ी है भारी।
दानव दल पर टूट पड़ो मां करके सिंह सवारी॥
सौ-सौ सिंहों से है बलशाली है दस भुजाओं वाली।
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती।
दुष्टों को तू ही संहारती।
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती।

माँ-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता।
पूत-कपूत सुने हैं पर ना माता सुनी कुमाता॥
सब पे करूणा दरसाने वाली, अमृत बरसाने वाली।
दुखियों के दुखड़े निवारती।
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती।

नहीं मांगते धन और दौलत न चांदी न सोना।
हम तो मांगें मां तेरे मन में एक छोटा सा कोना॥
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली।
सतियों के सत को संवारती।
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती।

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