By हरिहरन (Hariharan)


बजरंग बाण – हरिहरन | Bajrang Baan Lyrics & Meaning in Hindi

बजरंग बाण (Bajrang Baan) – हरिहरन

गायक: हरिहरन

रचनाकार: गोस्वामी तुलसीदास

शैली: भक्ति संगीत / भजन

परिचय (About)

बजरंग बाण भगवान हनुमान की अमोघ शक्ति का प्रतीक है। हरिहरन की मखमली और गंभीर आवाज़ में गाया गया यह भजन न केवल कानों को प्रिय लगता है, बल्कि आत्मा को भी झकझोर देता है। यह पाठ विशेष रूप से तब किया जाता है जब कोई भक्त घोर संकट, भय या स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा हो। ‘बाण’ का अर्थ है तीर, जो अपने लक्ष्य को भेद कर ही रहता है; इसी प्रकार यह पाठ हनुमान जी की कृपा सुनिश्चित करता है।

इतिहास (History)

इस स्तोत्र की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी। किंवदंतियों के अनुसार, एक बार तुलसीदास जी को काशी में बहुत ही पीड़ादायक फोड़े या वात रोग ने जकड़ लिया था। औषधियों के विफल होने पर, उन्होंने हनुमान जी का आह्वान करते हुए बजरंग बाण की रचना की। इसमें उन्होंने हनुमान जी को श्रीराम की सौगंध दी, जिसके फलस्वरूप वे तुरंत स्वस्थ हो गए। हरिहरन का यह संस्करण 90 के दशक में गुलशन कुमार द्वारा प्रस्तुत किया गया था और आज भी घर-घर में गूंजता है।

बजरंग बाण लिरिक्स (Bajrang Baan Lyrics in Hindi)

(दोहा) निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान। तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥ (चौपाई) जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥ जन के काज बिलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥ जैसे कूदि सिंधु महिपारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥ आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुरलोका॥ जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा॥ बाग उजारि सिंधु महँ बोरा। अति आतुर यमकातर तोरा॥ अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥ लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर नभ भई॥ अब बिलंब केहि कारन स्वामी। कृपा करहु उर अंतरयामी॥ जय कपिीश जय पवन कुमारा। जय जगवंदन जय जयकारा॥ जय आदित्य अमर अभयकारी। अरि मर्दन मोचन अघहारी॥ जय जय जय हनुमंत अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा॥ पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥ वन उपवन मग गिरि गृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं॥ जनकसुता हरि दास कहावो। ताकी शपथ विलंब न लावो॥ जय जय जय धुनि होत अकाशा। सुमिरत होत दुसह दुःख नाशा॥ चरण पकरि, कर जोरि मनावौं। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं॥ अथु मरुतसुत दास तुम्हारा। व्याकुल देखि निपट नहिं हारा॥ उठु उठु चलु तोहि राम दुहाई। पायँ परौं कर जोरि मनाई॥ ॐ चं चं चं चं चपल चलंता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥ ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल॥ अपने जन को तुरत उबारौ। सुमिरत आनन्द हमारौ॥ यह बजरंग बाण जेहि मारै। ताहि कहौ फिरि कवन उबारै॥ पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करैं प्राण की॥ यह बजरंग बाण जो जापै। तासों भूत-प्रेत सब काँपै॥ धूप देय जो जपै हमेशा। ताके तन नहिं रहै कलेशा॥ (दोहा) उर प्रतीति दृढ़, सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान। बाधा सब हर, करैं सब काम सफल हनुमान॥

भावार्थ और विश्लेषण (Meaning Analysis)

बजरंग बाण का प्रत्येक शब्द शक्ति से ओत-प्रोत है।

  • भक्त की व्याकुलता: भक्त कहता है कि मैं पूजा-पाठ के नियम नहीं जानता (पूजा जप तप नेम अचारा…), मैं केवल आपका दास हूँ।
  • श्रीराम की शपथ: इस पाठ का सबसे शक्तिशाली पहलू वह है जहाँ भक्त हनुमान जी को ‘राम दुहाई’ (राम की कसम) देता है। यह हनुमान जी को विवश करता है कि वे तुरंत अपने भक्त की रक्षा करें।
  • बीज मंत्र: इसमें ‘ॐ चं चं चं चं’ और ‘ॐ हं हं’ जैसे बीज मंत्रों का उपयोग किया गया है, जो ध्वनि विज्ञान (Sound Therapy) के अनुसार वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

रोचक तथ्य (Trivia)

  • रोग निवारक: मान्यता है कि असाध्य रोगों में, विशेषकर शारीरिक पीड़ा में, बजरंग बाण का पाठ अचूक होता है।
  • तांत्रिक महत्व: इसमें प्रयुक्त बीज मंत्र इसे सामान्य भजन से अलग एक तांत्रिक स्तोत्र का दर्जा देते हैं।
  • हरिहरन का प्रभाव: हरिहरन ने इसे भारतीय शास्त्रीय संगीत की ‘ध्रुपद’ अंग जैसी गंभीरता के साथ गाया है, जो इसे अन्य फिल्मी भजनों से अलग करता है।
  • सावधानी: कई विद्वान मानते हैं कि इसमें भगवान को शपथ दी जाती है, इसलिए इसका पाठ तभी करना चाहिए जब आप भारी संकट में हों।