अर्थ : जो सभी मंगलों के आधार हैं, जो मंगल करने वाले और अमंगल को हरण करनेवाले हो, दूर करने वाले हो ऐसे आप दशरथजी के आंँगन में विहार करनेवाले हैं,हे श्री राम! आप मुझ पर द्रवित हों, मुझपर अपनी कृपा वृष्टि करें।
होइहि सोइ जो राम रचि राखा।
को करि तर्क बढ़ावै साखा॥
अर्थ : वही होना निश्चित है जो भगवान राम ने पहले से ही नियत कर रखा है। और इसलिए व्यर्थ के तर्क करके इस बात पर बहुत सारा विवाद करना व्यर्थ है।
हो, धीरज धरम मित्र अरु नारी।
आपद काल परखिये चारी।।
अर्थ : जब अपने जीवन में आपत्ति का या मुसीबत का समय होता है तब ही हमारे धीरज की हमारे धर्म की और हमारे मित्र की मित्रता की और पत्नी की परीक्षा होती है। अन्य समय में तो सब कुछ सामान्य रहता है। और इन बातों का पता नहीं लगाया जा सकता कि वे हमारे कितने सच्चे मित्र आदि हैं। वे अपना कर्तव्य या धर्म हमारे प्रति निर्वाह करते हैं या नहीं यह आपत्ति के समय ही पता चलता है।
जेहिके जेहि पर सत्य सनेहू।
सो तेहि मिलहिं न कछु सन्देहू।।
अर्थ : जिसकी जिसके प्रति सच्चा प्रीति अथवा गहरा स्नेहा होता है उसे वह अवश्य ही मिलता है इसमें किसी भी प्रकार का कोई संदेह नहीं है।
हो, जाकी रही भावना जैसी।
प्रभु मूरति देखी तिन तैसी।।
अर्थ : ईश्वर में जिसकी जैसी भावना होती है ईश्वर के विग्रह से उसे वैसा ही अनुभव होता है।
रघुकुल रीत सदा चली आई।
प्राण जाए पर वचन न जाई।।
अर्थ : रघुवंश में जन्म लेने वाले, जिनके नाम से इस वंश का नाम रघुवंश पड़ा है। ऐसे राजा रघु के कुल में यह परंपरा चली आई है कि भले ही प्राण चले जाएंँ किंतु रघुकुल के लोग सदैव अपना वचन अवश्य निभाते हैं।
हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता।
कहहि सुनहि बहुविधि सब संता।।
अर्थ : ईश्वर का एक नाम अनंत है अर्थात वे सर्व व्याप्त है कहीं भी उनका अंत नहीं है अनंत हैं वे। उसी प्रकार ईश्वर की कथा भी अनंत है उसकी भी कोई सीमा नहीं है। ऐसी कथा को संत लोग भिन्न-भिन्न प्रकार से कहते और सुनते रहते हैं।
FAQs
Q. अजिर बिहारी का मतलब क्या होता है?
Ans – अजिर यानि आँगन व बिहारी मतलब विहरने वाला या घूमने वाला। तो द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी का अर्थ है – बाल रूप में दशरथ के आँगन मे विचरण करने वाले हे श्री राम, हम पर प्रसन्न हों। मंगल करने वाले व अमंगल को हरने वाले, बाल रूप में दशरथ के आँगन मे विचरण करने वाले, हे श्री राम, हम पर प्रसन्न हों।
Q. मंगल भवन अमंगल हारी द्रवहु सो दशरथ अजिर बिहारी इन पंक्तियों में कौन सा छंद है?
Ans – इन पंक्तियों में चौपाई छन्द का प्रयोग हुआ है, अन्य विकल्प असंगत है, अत: विकल्प 2 ‘चौपाई’ सही उत्तर होगा। चौपाई मात्रिक सम छंद है।
Q. मंगल भवन अमंगल हारी द्रवहु सुदसरथ अचर बिहारी।
(अर्थ : जो मंगल करने वाले है और अमंगल को दूर करने वाले है , वो दशरथ नंदन श्री राम है, वो मुझपर अपनी कृपा करे.)
शिव शंकर को जिसने पूजा उसका ही उद्धार हुआ – भजन (Shiv Shankar Ko Jisne Pooja)
शिव शंकर को जिसने पूजा,
उसका ही उद्धार हुआ ।
अंत काल को भवसागर में,
उसका बेडा पार हुआ ॥
भोले शंकर की पूजा करो, ध्यान चरणों में इसके धरो । हर हर महादेव शिव शम्भू, हर हर महादेव शिव शम्भू । हर हर महादेव शिव शम्भू…
डमरू वाला है जग में दयालु बड़ा दीन दुखियों का देता जगत का पिता ॥ सब पे करता है ये भोला शंकर दया सबको देता है ये आसरा ॥
इन पावन चरणों में अर्पण, आकर जो इक बार हुआ, अंतकाल को भवसागर में, उसका बेडा पार हुआ, हर हर महादेव शिव शम्भू, हर हर महादेव शिव शम्भू । हर हर महादेव शिव शम्भू…
नाम ऊँचा है सबसे महादेव का, वंदना इसकी करते है सब देवता । इसकी पूजा से वरदान पातें हैं सब, शक्ति का दान पातें हैं सब।
नाथ असुर प्राणी सब पर ही, भोले का उपकार हुआ । अंत काल को भवसागर में, उसका बेडा पार हुआ॥
शिव शंकर को जिसने पूजा, उसका ही उद्धार हुआ । अंत काल को भवसागर में, उसका बेडा पार हुआ ॥
भोले शंकर की पूजा करो,
ध्यान चरणों में इसके धरो ।
हर हर महादेव शिव शम्भू,
हर हर महादेव शिव शम्भू ।
हर हर महादेव शिव शम्भू…
IN ENGLISH –
Shiv Shankar Ko Jisne Puja Uska Hi Udhar Hua Lyrics in English
Shiv Shankar Ko Jisne Pooja, Uska Hi Udhar Hua, Ant Kaal Ko Bhavsagar Mein, Uska Beda Paar Hua.
Bhole Shankar Ki Pooja Karo, Dhyan Charano Mein Iske Dharo, Har Har Mahadev Shiv Shambhu, Har Har Mahadev Shiv Shambhu. Har Har Mahadev Shiv Shambhu…
Damru Wala Hai Jag Mein Dayalu Bada, Deen Dukhiyon Ka Deta Jagat Ka Pita, Sab Pe Karta Hai Ye Bhola Shankar Daya, Sabko Deta Hai Ye Aasra.
in pawan charno mein arpan aakar jo ek baar hua ant kaal ko bhavsagar mein uska beda paar hua om namo shivay namo har har mahadev shiv shambu
naam uncha hai sabse mahadev ka vandana iski karte hain sab devta.. iski puja se vardan pate hain sab shakti ka daan pate hain sab.. nag asur prani sab par hi bhole ka upkar hua ant kaal ko bhavsagar mein uska beda paar hua
shiv shankar ko jisne puja uska hi udhar hua ant kaal ko bhavsagar mein uska beda paar hua bhole shankar ki puja karo dhayan charno mein iske dharo har har mahadev shiv shambu
“भुज: द प्राइड ऑफ इंडिया” एक बॉलीवुड फिल्म है जो 2021 में रिलीज हुई थी। यह फिल्म 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान सेट की गई है और भुज हवाई अड्डे के तत्कालीन प्रभारी आईएएफ स्क्वाड्रन लीडर विजय कार्णिक के जीवन पर केंद्रित है, जिन्होंने अपनी टीम के साथ 300 स्थानीय महिलाओं की मदद से आईएएफ एयरबेस का पुनर्निर्माण किया था।
भुज द प्राइड ऑफ इंडिया सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्म है। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध पर आधारित इस फिल्म में अजय देवगन ने भुज एयरपोर्ट के तत्कालीन प्रभारी विजय कार्णिक की भूमिका निभाई है। इस लड़ाई के दौरान स्क्वाड्रन लीडर विजय कार्णिक अपनी टीम के साथ भुज एयरपोर्ट पर मौजूद थे, जहां हवाई पट्टी नष्ट हो गई थी. इसी बीच पाकिस्तान की ओर से बमबारी की जा रही थी. इस वक्त एयर बेस पर उनके साथ 50 वायुसेना और 60 रक्षा सुरक्षाकर्मी मौजूद थे. विजय कार्णिक और उनकी टीम ने स्थानीय महिलाओं की मदद से हवाई पट्टी का पुनर्निर्माण किया। उन्होंने क्षेत्र की 300 महिलाओं के साथ मिलकर इसका पुनर्निर्माण किया ताकि भारतीय सैनिकों को ले जाने वाली उड़ानें आसानी से उतर सकें।
कहानी(Story – Plot)
फिल्म की शुरुआत 8 दिसंबर 1971 को होती है, जब पाकिस्तानी वायु सेना के जेट विमान भुज में भारतीय वायु सेना की हवाई पट्टी पर बार-बार बमबारी करते हैं। भारी विनाश के बीच स्थिति से निपटने की कोशिश करते समय भुज हवाई अड्डे के प्रभारी विजय कार्णिक (अजय देवगन) का दुश्मनों से सामना होता है। कहानी एक सप्ताह पहले की है और कहा जाता है कि भारत ने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) को पश्चिमी पाकिस्तान (पाक) के उत्पीड़न से बचने में मदद की थी। इसके कारण दिसंबर 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध हुआ। पूर्वी पाकिस्तान में भारत की स्थिति कमज़ोर करने के लिए पाकिस्तान ने भारत के पश्चिमी क्षेत्रों पर आक्रमण कर दिया। वे भुज पर अधिकार करना चाहते थे। रणनीति के तहत विभिन्न भारतीय हवाई अड्डों पर बमबारी की गई। भुज एयरबेस भारतीय वायु सेना के प्रमुख क्षेत्रों में से एक था जहां पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
भारतीय वायु सेना को सीमा सुरक्षा बल से हवाई पट्टी बहाल करने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका क्योंकि पाकिस्तान ने भी उसी समय लोंगेवाला में लड़ाई शुरू कर दी थी। इस दौरान भुज के माधापुर के 300 ग्रामीणों – जिनमें ज्यादातर महिलाएं थीं – ने 72 घंटों के भीतर क्षतिग्रस्त एयरबेस की मरम्मत करके देश की रक्षा के लिए आगे बढ़ने का फैसला किया। फिल्म इसी घटना के इर्द-गिर्द घूमती है और कैसे विजय कार्णिक ने उस युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
हम होंगे कामयाब (अंग्रेज़ी: We Shall Overcome का गिरिजा कुमार माथुर द्वारा किया गया हिंदी भावानुवाद) एक प्रतिरोध गीत है। यह गीत बीसवीं सदी में नागरिक अधिकार आंदोलन का प्रधान स्वर बना। इस गीत को आमतौर पर “I’ll Overcome Some Day” (“आई विल ओवरकम सम डे”) से काव्यावतरित माना जाता है, जो चार्ल्स अल्बर्ट टिंडले द्वारा गाया गया था और जिसे 1900 में पहली बार प्रकाशित किया गया था।
We Shall Overcome Lyrics
We shall overcome, we shall overcome,
We shall overcome someday;
Oh, deep in my heart, I do believe,
We shall overcome someday.
The Lord will see us through, The Lord will see us through,
The Lord will see us through someday;
Oh, deep in my heart, I do believe,
We shall overcome someday.
We’re on to victory, We’re on to victory,
We’re on to victory someday;
Oh, deep in my heart, I do believe,
We’re on to victory someday.
We’ll walk hand in hand, we’ll walk hand in hand,
We’ll walk hand in hand someday;
Oh, deep in my heart, I do believe,
We’ll walk hand in hand someday.
We are not afraid, we are not afraid,
We are not afraid today;
Oh, deep in my heart, I do believe,
We are not afraid today.
The truth shall make us free, the truth shall make us free,
The truth shall make us free someday;
Oh, deep in my heart, I do believe,
The truth shall make us free someday.
We shall live in peace, we shall live in peace,
We shall live in peace someday;
Oh, deep in my heart, I do believe,
We shall live in peace someday.
Hindi Translation of we shall overcome
हम जीतेंगे – गीत
होंगे कामयाब होंगे कामयाब,
हम होंगे कामयाब एक दिन;
ओह, मेरे दिल की गहराई में, मुझे विश्वास है,
हम होंगे कामयाब एक दिन।
प्रभु हमें देखेंगे, प्रभु हमें देखेंगे,
किसी दिन प्रभु हमें अवश्य देखेंगे;
ओह, मेरे दिल की गहराई में, मुझे विश्वास है,
हम होंगे कामयाब एक दिन।
हम जीत की ओर हैं, हम जीत की ओर हैं,
हम किसी दिन जीत की ओर अग्रसर हैं;
ओह, मेरे दिल की गहराई में, मुझे विश्वास है,
हम किसी दिन जीत की ओर अग्रसर हैं।
हम हाथ में हाथ डालकर चलेंगे, हम हाथ में हाथ डालकर चलेंगे,
हम किसी दिन हाथ में हाथ डालकर चलेंगे;
ओह, मेरे दिल की गहराई में, मुझे विश्वास है,
हम किसी दिन हाथ में हाथ डालकर चलेंगे।
हम डरते नहीं, हम डरते नहीं,
हम आज डरे हुए नहीं हैं;
ओह, मेरे दिल की गहराई में, मुझे विश्वास है,
हम आज डरने वाले नहीं हैं.
सत्य हमें स्वतंत्र बनायेगा, सत्य हमें स्वतंत्र बनायेगा,
अपना बना ले Apna Bana Le Lyrics in Hindi – Bhediya (Arijit Singh)
तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे किया रे जो भी तूने कैसा किया रे जिया को मेरे बंधन ऐसे लिया रे समज के भी न समझ मैं सकूँ
सवेरों का मेरे तू सूरज लागे तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे
अपना बना ले पिया अपना बना ले पिया अपना बना ले मुझे
अपना बना ले पिया अपना बना ले पिया अपना बना ले पिया दिल के नगर में शहर तू बसा ले पिया
छूने से तेरे हाँ तेरे हां तेरे फीकी रातों को रंग लगे छूने से तेरे हाँ तेरे हां तेरे फीकी रातों को रंग लगे
तेरी दिशा में क्यों चलने से मेरे जोड़ी को पंख लगे रहा न मेरे काम का जग सारा
हां बस तेरे नाम से ही गुजारा उलझ के यूं न सुलझ मैं सकूँ जुबानिया तेरी झूठी भी सच लागे तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे तू मेरा कोई ना होके भी कुछ लागे
अपना बना ले पिया अपना बना ले पिया अपना बना ले मुझे अपना बना ले पिया
अपना बना ले पिया अपना बना ले पिया दिल के नगर में शहर तू बसा ले पिया
हो सब कुछ मेरा चाहे नाम अपने लिखा ले बदले में इतनी तो यारी निभा ले जग की हिरासत से मुझे छुडा ले अपना बना ले बस अपना बना ले अपना बना ले अपना बना ले
Apna Bana Le Lyrics in English
Tu mera koyi na hoke bhi kuch laage Tu mera koyi na hoke bhi kuch laage Kiya re jo bhi toone kaise kiya re Jiya ko mere baandh aise liya re Samajh ke bhi na samajh main sakun
Saveron ka mere tu suraj laage Tu mera koyi na hoke bhi kuch laage Tu mera koyi na hoke bhi kuch laage Tu mera koyi na hoke bhi kuch laage
Apna bana le piya Apna bana le piya Apna bana le mujhe
Apna bana le piya Apna bana le piya Apna bana le piya Dil ke nagar mein Shehar tu basa le piya
Chhoone se tere haan tere haan tere Pheeki ruton ko rang lage Chhoone se tere haan tere haan tere Pheeki ruton ko rang lage
Teri disha mein kyun chalne se mere Pairon ko pankh lage Raha na mere kaam ka jag saara
Haan bas tere naam se hi guzara Ulajh ke yoon na sulajh main sakun Zubaniyan teri jhoothi bhi sach laage Tu mera koyi na hoke bhi kuch laage Tu mera koyi na hoke bhi kuch laage Tu mera koyi na hoke bhi kuch laage
Apna bana le piya Apna bana le piya Apna bana le mujhe Apna bana le piya
Apna bana le piya Apna bana le piya Dil ke nagar mein Shehar tu basa le piya
Ho sab kuch mera chahe Naam apne likha le Badle mein itni to Yaari nibha le Jag ki hirasat se Mujhko chhuda le Apna bana le bas Apna bana le Apna bana le Apna bana le
1.1: हे अच्युत (अच्युत अर्थात जो चलायमान नहीं होता सदा स्थिर रहता है), मैं आपको प्रणाम करता हूंँ, हे केशव (जो सभी को धारण और नियंत्रित करता है, जिसके सुंदर बाल हैं और जिसने राक्षस केशी को मार डाला), मैं आपको प्रणाम करता हूंँ, हे नारायण के अवतार राम (जो बिना किसी दोष के हैं), मैं आपको प्रणाम करता हूंँ।
1.2: हे कृष्ण (जो अपने दिव्य गुणों और सौंदर्य से दूसरों को आकर्षित करते हैं) जो दामोदर के नाम से जाने जाते हैं (जिन्हें माता यशोदा ने कमर में बांधा था), मैं आपको नमस्कार करता हूंँ, हे वासुदेव (वसुदेव के पुत्र), मैं आपको नमस्कार करता हूंँ, हे हरि (जो पापों को हर लेते हैं, जो यज्ञ का प्रसाद प्राप्त करते हैं), मैं आपको नमस्कार करता हूंँ।
1.3: हे श्रीधर (जो श्री को अपने हृदय में धारण करते हैं) मैं तुम्हें प्रणाम करता हूंँ, हे माधव (महालक्ष्मी जिनकी पत्नी हैं) मैं तुम्हें प्रणाम करता हूंँ l जो गोपिकाओं (वृंदावन कि ग्वालिनों) में सबसे प्रिय थे और
1.4: हे जानकी के स्वामी रामचन्द्र, मैं आपको नमस्कार करता हूँ।
2.1: हे अच्युत , मैं तुम्हें नमस्कार करता हूंँ, हे केशव (जो सभी को धारण और नियंत्रित करता है, जिसके सुंदर बाल हैं और जिसने राक्षस केशी को मार डाला), मैं तुम्हें नमस्कार करता हूंँ जो सत्यभामा के स्वामी थे,
2.2: हे माधव (महालक्ष्मी जिनकी पत्नी हैं), मैं तुम्हें प्रणाम करता हूंँ, हे श्रीधर (जो श्री को अपने सीने पर धारण करते हैं), मैं तुम्हें प्रणाम करता हूंँ, जिनकी पूजा राधिका करती थी,
2.3: मैं तुम्हें प्रणाम करता हूंँ जो इंदिरा का मंदिर है (अर्थात् उनके हृदय में देवी महालक्ष्मी का पवित्र निवास स्थान), मैं तुम्हें प्रणाम करता हूंँ जो एक सुंदर वैभव हैं,
2.4: मैं आपको नमस्कार करता हूंँ जो देवकी के पुत्र हैं और मैं आपको भी नमस्कार करता हूंँ जो नंद को दिए जाने के कारण उनके पुत्र बने।
3.1: मैं तुम्हें नमस्कार करता हूंँ जो विष्णु (सर्वव्यापी) हैं, मैं तुम्हें नमस्कार करता हूंँ जो जिष्णु (सर्वदा विजयी) हूंँ, मैं तुम्हें नमस्कार करता हूंँ जो शंख धारण करते हैं , मैं तुम्हें नमस्कार करता हूंँ जो चक्र (चक्र) धारण करता हैं।
3.2: मैं आपको नमस्कार करता हूंँ जो रुक्मिणी को अत्यंत प्रिय हैं, मैं आपको नमस्कार करता हूंँ जिनकी पत्नी जानकी थीं,
3.3: मैं आपको प्रणाम करता हूंँ जिनकी प्यारी ग्वालबालों ने अपने हृदय में पूजा की थी,
3.4: मैं आपको प्रणाम करता हूंँ जिन्होंने कंस का विनाश किया और मैं आपको प्रणाम करता हूंँ जिन्होंने बांसुरी बजाई।
कृष्ण गोविन्द हे राम नारायण श्रीपते वासुदेवाजित श्रीनिधे । अच्युतानन्त हे माधवाधोक्षज द्वारकानायक द्रौपदीरक्षक ॥४॥
अर्थ:4
4.1: हे कृष्ण, गोविंद के अवतार (जिन्हें वेदों के माध्यम से जाना जा सकता है), मैं आपको प्रणाम करता हूंँ, हे नारायण के अवतार राम (जो बिना किसी दोष के हैं), मैं आपको प्रणाम करता हूंँ।
4.2: हे श्रीपति (श्री के स्वामी), मैं आपको प्रणाम करता हूंँ, हे वासुदेव (वसुदेव के पुत्र), अजेय, मैं आपको प्रणाम करता हूंँ, हे श्रीनिधि (श्री के भंडार), मैं आपको प्रणाम करता हूंँ।
4.3: हे अच्युत, हे अनंत, मैं आपको नमस्कार करता हूंँ, मैं आपको नमस्कार करता हूंँ । हे माधव , अधोक्षज के अवतार (जिन्हें केवल आगम के माध्यम से ही जाना जा सकता है),
4.4: हे द्वारका के भगवान, मैं आपको प्रणाम करता हूंँ और मैं आपको प्रणाम करता हूंँ जिन्होंने द्रौपदी को बचाया।
5.1: मैं आपको प्रणाम करता हूंँ जिन्होंने राक्षसों को भयभीत किया (श्री राम के रूप में), मैं आपको प्रणाम करता हूंँ जो देवी सीता के संग अपने पक्ष में सुशोभित हैं,
5.2: मैं आपको प्रणाम करता हूंँ जो दंडकारण्य की भूमि की शुद्धि का कारण थे,
5.3: मैं आपको नमस्कार करता हूंँ जिनकी सेवा लक्ष्मण ने की थी, मैं आपको नमस्कार करता हूंँ जिनकी सेवा वानरों ने की थी और
5.4: मैं आपको नमस्कार करता हूंँ जिनकी पूजा ऋषि अगस्त्य ने की थी; हे राघव कृपया मेरी रक्षा करें।
6.1: मैं आपको (बांसुरी वादक को) प्रणाम करता हूंँ जिसने राक्षसों धेनुका और अरिष्टक (कंस द्वारा भेजे गए) कि शत्रुता एवं आक्रमणों को विफल कर दिया,
6.2: और केसी और कंस को भी, मैं आपको प्रणाम करता हूंँ जिन्होंने अपनी बांसुरी पर भावपूर्ण धुनें बजाईं और
6.3: मैं आपको (बालगोपाल को) प्रणाम करता हूंँ, जिन्होंने पूतना के क्रोध को विफल कर दिया, जिसने देवी के रूप मेंआकर छल किया (अर्थात् बाल कृष्ण को मारने के लिए देवी का रूप धारण किया),
6.4: हे बालगोपाल, मैं आपको प्रणाम करता हूंँ, कृपया हमेशा मेरी रक्षा करें (जैसे आपने राक्षसों के हमलों को विफल कर दिया था, वैसे ही मेरे खतरों को विफल करके आप मेरी रक्षा करें)।
1.1: I Salute You O Acyuta (the Infallible One), I Salute You O Keshava (Who nominates and Controls everyone, Who has beautiful Hair and Who killed the demon Keshi), I Salute You O Rama the Incarnation of Narayana (Who is without any blemish), 1.2: I Salute You O Krishna (Who attracts others by His Divine Attributes and Beauty) Who is known as Damodara (Who was tied by Mother Yashoda around the waist) , I Salute You O Vasudeva (Son of Vasudeva), I Salute You O Hari (Who takes away the Sins, Who Receives the Offerings of the Yajna), 1.3: I Salute You O Sridhara (Who Bears Sri on His Chest), I Salute You O Madhava (Consort of Mahalakshmi), I Salute You Who was the Most Beloved of the Gopikas (the Cowherd Girls of Vrindavana) and 1.4: I Salute You O Ramachandra the Lord of Janaki.
2.1: I Salute You O Acyuta (the Infallible One), I Salute You O Keshava (Who nominates and Controls everyone, Who has beautiful Hair and Who killed the demon Keshi), I Salute You Who was the Lord of Satyabhama, 2.2: I Salute You O Madhava (Consort of Mahalakshmi), I Salute You O Sridhara (Who Bears Sri on His Chest), I Salute You Who was Worshipped by Radhika, 2.3: I Salute You Who is the Temple of Indira (i.e. the Sacred Abiding Place of Devi Mahalakshmi in His Heart), I Salute You Who has a Beautiful Splendour, 2.4: I Salute You Who is the Son of Devaki and I Salute You Who became the Son of Nanda by being Given to him.
3.1: I Salute You Who is Vishnu (the All-Pervading One), I Salute You Who is Jishnu (the ever Victorious One), I Salute You Who holds the Sankha (the Conch-Shell), I Salute You O holds the Chakra (the Discus), 3.2: I Salute You Who is Extremely Dear to Rukmini, I Salute You Who had Janaki as His Wife, 3.3: I Salute You Who was Worshipped by the Beloved Cowherd Girls in their Hearts, 3.4: I Salute You Who Destroyed Kamsa and I Salute You Who Played the Flute.
Krssnna Govinda He Raama Naaraayanna Shrii-Pate Vaasudeva-Ajita Shrii-Nidhe | Acyuta-Ananta He Maadhava-Adhokssaja Dvaarakaa-Naayaka Draupadii-Rakssaka ||4||
Meaning:
4.1: I Salute You O Krishna the Incarnation of Govinda (Who can be known through Vedas), I Salute You O Rama the Incarnation of Narayana (Who is without any blemish), 4.2: I Salute You O Sripati (the Consort of Sri), I Salute You O Vasudeva (Son of Vasudeva) the Unconquerable One, I Salute You O Srinidhi (the Storehouse of Sri), 4.3: I Salute You O Acyuta (Who is Infallible) the Endless One, I Salute You O Madhava (Consort of Mahalakshmi) the Incarnation of Adhokshaja (Who can be known only through Agamas), 4.4: I Salute You O Lord of Dwaraka and I Salute You Who Saved Draupadi.
5.1: I Salute You Who Agitated the Rakshasas (as Sri Rama), I Salute You Who is Adorned by Devi Sita at His side, 5.2: I Salute You Who was the Cause of Purification of the Land of Dandakaranya, 5.3: I Salute You Who was Attended by Lakshmana, I Salute You Who was Served by the Vanaras (Monkeys) and 5.4: I Salute You Who was Worshipped by sage Agastya; O Raghava please Protect Me.
6.1: I Salute You (the Player of the Flute) Who Thwarted the Enmity and Attacks of demons Dhenuka and Aristaka (sent by Kamsa), 6.2: and also Kesi and Kamsa, I Salute You Who Played Soulful Tunes on His Flute and 6.3: I Salute You (the Balagopala) Who Thwarted the Anger of Putana who Played as Born of Deva (i.e. assumed the form of a Devi to kill child Krishna), 6.4: I Salute You O Balagopala, please Protect Me Always (by thwarting my dangers as You thwarted the attacks of the demons).
7.1: I Salute You Whose Garments Flash Like the Rise of Lightning in the Sky, 7.2: I Salute You Whose Handsome Form Moves Like the Clouds of the Rainy Season, 7.3: I Salute You Whose Chest is Adorned with Vanamala (Garland of Wild Flowers) and 7.4: I Salute You Whose Pair of Feet is Beautiful Reddish and Whose Eyes are like Lotus.
8.1: I Salute You Who has Beautiful Locks of Curly Hairs over His Shining Face, 8.2: I Salute You Whose Face is Adorned with Gem on the Head and Shining Ear-Rings on the Ears, 8.3: I Salute You Whose Arms and Waist are Adorned with Shining Bracelets, 8.4: I Salute You Who wear Tiny Bells over His Dark Body which make Pleasing Sounds.
9.1: Whoever Recites the Acyutashtakam as an Offering to Ishta (i.e. Acyuta), 9.2: With Devotion, Everyday and with Longing for the Purusha (the Supreme Being), 9.3: The Acyutashtakam Which Beautifully Encircles the All-Sustaining Being, 9.4: Will Quickly reach the Abode of Hari by His Will.
अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते । भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥
सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २ ॥
अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रियवासिनि हासरते शिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमालय शृङ्गनिजालय मध्यगते । मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ३ ॥
अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्द गजाधिपते रिपुगजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रमशुण्ड मृगाधिपते । निजभुजदण्ड निपातितखण्ड विपातितमुण्ड भटाधिपते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ४ ॥
अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभृते चतुरविचार धुरीणमहाशिव दूतकृत प्रमथाधिपते । दुरितदुरीह दुराशयदुर्मति दानवदुत कृतान्तमते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ५ ॥
अयि शरणागत वैरिवधुवर वीरवराभय दायकरे त्रिभुवनमस्तक शुलविरोधि शिरोऽधिकृतामल शुलकरे । दुमिदुमितामर धुन्दुभिनादमहोमुखरीकृत दिङ्मकरे जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ६ ॥
अयि निजहुङ्कृति मात्रनिराकृत धूम्रविलोचन धूम्रशते समरविशोषित शोणितबीज समुद्भवशोणित बीजलते । शिवशिवशुम्भ निशुम्भमहाहव तर्पितभूत पिशाचरते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ७ ॥
धनुरनुषङ्ग रणक्षणसङ्ग परिस्फुरदङ्ग नटत्कटके कनकपिशङ्ग पृषत्कनिषङ्ग रसद्भटशृङ्ग हताबटुके । कृतचतुरङ्ग बलक्षितिरङ्ग घटद्बहुरङ्ग रटद्बटुके जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ८ ॥
सुरललना ततथेयि तथेयि कृताभिनयोदर नृत्यरते कृत कुकुथः कुकुथो गडदादिकताल कुतूहल गानरते । धुधुकुट धुक्कुट धिंधिमित ध्वनि धीर मृदङ्ग निनादरते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ९ ॥
जय जय जप्य जयेजयशब्द परस्तुति तत्परविश्वनुते झणझणझिञ्झिमि झिङ्कृत नूपुरशिञ्जितमोहित भूतपते । नटित नटार्ध नटी नट नायक नाटितनाट्य सुगानरते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १० ॥
अयि सुमनःसुमनःसुमनः सुमनःसुमनोहरकान्तियुते श्रितरजनी रजनीरजनी रजनीरजनी करवक्त्रवृते । सुनयनविभ्रमर भ्रमरभ्रमर भ्रमरभ्रमराधिपते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ११ ॥
सहितमहाहव मल्लमतल्लिक मल्लितरल्लक मल्लरते विरचितवल्लिक पल्लिकमल्लिक झिल्लिकभिल्लिक वर्गवृते । शितकृतफुल्ल समुल्लसितारुण तल्लजपल्लव सल्ललिते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १२ ॥
अविरलगण्ड गलन्मदमेदुर मत्तमतङ्ग जराजपते त्रिभुवनभुषण भूतकलानिधि रूपपयोनिधि राजसुते । अयि सुदतीजन लालसमानस मोहन मन्मथराजसुते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १३ ॥
कमलदलामल कोमलकान्ति कलाकलितामल भाललते सकलविलास कलानिलयक्रम केलिचलत्कल हंसकुले । अलिकुलसङ्कुल कुवलयमण्डल मौलिमिलद्बकुलालिकुले जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १४ ॥
करमुरलीरव वीजितकूजित लज्जितकोकिल मञ्जुमते मिलितपुलिन्द मनोहरगुञ्जित रञ्जितशैल निकुञ्जगते । निजगणभूत महाशबरीगण सद्गुणसम्भृत केलितले जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १५ ॥
कटितटपीत दुकूलविचित्र मयुखतिरस्कृत चन्द्ररुचे प्रणतसुरासुर मौलिमणिस्फुर दंशुलसन्नख चन्द्ररुचे जितकनकाचल मौलिमदोर्जित निर्भरकुञ्जर कुम्भकुचे जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १६ ॥
विजितसहस्रकरैक सहस्रकरैक सहस्रकरैकनुते कृतसुरतारक सङ्गरतारक सङ्गरतारक सूनुसुते । सुरथसमाधि समानसमाधि समाधिसमाधि सुजातरते । जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १७ ॥
पदकमलं करुणानिलये वरिवस्यति योऽनुदिनं सुशिवे अयि कमले कमलानिलये कमलानिलयः स कथं न भवेत् । तव पदमेव परम्पदमित्यनुशीलयतो मम किं न शिवे जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १८ ॥
कनकलसत्कलसिन्धुजलैरनुषिञ्चति तेगुणरङ्गभुवम् भजति स किं न शचीकुचकुम्भतटीपरिरम्भसुखानुभवम् । तव चरणं शरणं करवाणि नतामरवाणि निवासि शिवम् जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १९ ॥
तव विमलेन्दुकुलं वदनेन्दुमलं सकलं ननु कूलयते किमु पुरुहूतपुरीन्दु मुखी सुमुखीभिरसौ विमुखीक्रियते । मम तु मतं शिवनामधने भवती कृपया किमुत क्रियते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २० ॥
अयि मयि दीन दयालुतया कृपयैव त्वया भवितव्यमुमे अयि जगतो जननी कृपयासि यथासि तथानुमितासिरते । यदुचितमत्र भवत्युररीकुरुतादुरुतापमपाकुरुते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २१ ॥
Pada-Kamalam Karunnaa-Nilaye Varivasyati Yo-[A]nudinam Su-Shive Ayi Kamale Kamalaa-Nilaye Kamalaa-Nilayah Sa Katham Na Bhavet | Tava Padam-Eva Param-Padam-Ity-Anushiilayato Mama Kim Na Shive Jaya Jaya He Mahissaasura-Mardini Ramya-Kapardini Shaila-Sute || 18 ||
Kanaka-Lasat-Kala-Sindhu-Jalair-Anussinccati Te-Gunna-Rangga-Bhuvam Bhajati Sa Kim Na Shacii-Kuca-Kumbha-Tattii-Parirambha-Sukha-[A]nubhavam | Tava Carannam Sharannam Kara-Vaanni Nata-Amara-Vaanni Nivaasi Shivam Jaya Jaya He Mahissaasura-Mardini Ramya-Kapardini Shaila-Sute || 19 ||
Tava Vimale[a-I]ndu-Kulam Vadane[a-I]ndu-Malam Sakalam Nanu Kuula-Yate Kimu Puruhuuta-Purii-Indu Mukhii Sumukhiibhir-Asou Vimukhii-Kriyate | Mama Tu Matam Shiva-Naama-Dhane Bhavatii Krpayaa Kimuta Kriyate Jaya Jaya He Mahissaasura-Mardini Ramya-Kapardini Shaila-Sute || 20 ||
अयिगिरि का अर्थ है पर्वतराज कि पुत्री (गिरि का अर्थ है पर्वत) और नंदिनी का अर्थ है जो दुनिया को खुशी/आनंद देती है। यह दुर्गा अवतार में देवी पार्वती को संदर्भित करता है जिन्होंने महिषासुर राक्षस का वध किया था। यही कारण है कि उन्हें महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है।
आईगिरी नंदिनी किसने लिखी है?
ऐगिरि नंदिनी की रचना आदि गुरु शंकराचार्य ने संस्कृत में की थी।
महिषासुर का क्या अर्थ है?
महिष शब्द का अर्थ है भैंसा और असुर का अर्थ है राक्षस। अतः महिषासुर का अर्थ भैंसा राक्षस है।
दुर्गा ने महिषासुर का वध कैसे किया?
महिषासुर एक राक्षस था जो जल्दी से अपना रूप बदल सकता था। उसे वरदान था कि वह कभी किसी मनुष्य के हाथों नहीं मारा जायेगा। जब इंद्र के नेतृत्व में भगवान और महिषासुर के नेतृत्व में राक्षसों के बीच युद्ध शुरू हुआ, तो देवता हार गए। निराश होकर देवताओं ने अपनी दिव्य शक्तियों को देवी दुर्गा में समाहित कर दिया। इसके बाद मां दुर्गा ने महिषासुर से 15 दिनों तक युद्ध किया और राक्षस महिषासुर का वध कर दिया।
एक प्रचलित लोककथा के अनुसार
यह स्तोत्र श्री आदि शंकराचार्य श्री मुख से गाया हुआ माँ भगवती का अत्यंत प्रिय स्तोत्र है। इसकी रचना उन्होंने स्वयं की थी।
इसकी उत्पत्ति के बारे में एक पौराणिक कथा प्रचलित है, जो आदि गुरु के जीवन की एक घटना से ली गई है।
एक बार वे अपने शिष्यों के साथ एक बहुत संकरी गली से स्नान के लिए मणिकर्णिका घाट जा रहे थे, मणिकर्णिका घाट एक श्मशान घाट भी है।
सड़क पर एक युवती अपने मृत पति का सिर गोद में लेकर बैठी विलाप कर रही थी, सड़क संकरी होने के कारण शव को हटाना आवश्यक था, न कि उसे पार करना, सड़क पार करना, हमारे धर्म में किसी भी व्यक्ति को पार करना स्वयं भगवान को पार करना है, इसलिए यह बिल्कुल वर्जित है।
उनके शिष्यों ने महिला से अपने पति के शव को हटाने और रास्ता देने की प्रार्थना की, किंतु महिला ने उनकी बात सुनकर भी अनसुनी कर दी और सुने बिना ही रोती रही। तब आचार्य ने स्वयं उनसे शव हटाने का अनुरोध किया।
उनकी विनती सुनकर वह स्त्री कहने लगी- ‘हे महात्मा! आप बार-बार मुझसे इस शरीर को हटाने के लिए कह रहे हैं। आप इसी शरीर को जाने के लिए क्यों नहीं कहते?’
यह सुनकर आचार्य ने कहा-हे देवी! शायद तुम शोक में यह भूल गयी हो कि शव में स्वयं हिलने-डुलने की शक्ति नहीं होती।’
स्त्री ने तुरंत उत्तर दिया – ‘महात्मा, आपके अनुसार शक्तिहीन ब्रह्म ही संसार का कर्ता है। तो फिर इस शरीर को बिना शक्ति के हटाया क्यों नहीं जा सकता?’
उस स्त्री का इतना गंभीर, ज्ञानपूर्ण, रहस्यमय वाक्य सुनकर आचार्य वहीं बैठ गए, उन्हें समाधि लग गई और समाधि में निमग्न होकर उन्होंने सारे रहस्य को समझ लिया।
सर्वत्र आद्या शक्ति महामाया लीला का विलास है। उनका हृदय अवर्णनीय आनंद से भर गया और मातृवंदन के शब्द उनके मुख से इस महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र के रूप में आविर्भूत होने लगे ।
महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र के पाठ का बड़ा महत्व है |
इस स्तोत्र को बहुत शक्तिशाली माना जाता है, मान्यताओं के अनुसार इस स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाएंँ दूर हो जाती हैं।
यह भी माना जाता है कि जिसे शक्ति की इच्छा हो उसे इस स्तोत्र से मांँ भगवती की आराधना करनी चाहिए। इनकी पूजा करने से बड़े से बड़े दुःख भी तुरंत दूर हो जाते हैं।
वैसे तो हिंदू धर्मग्रंथों में मां की पूजा के कई तरीके बताए गए हैं, लेकिन उनमें से इस स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। आद्य शंकराचार्य स्वयं एक सिद्ध पुरुष थे और इस महान स्तोत्र में उनकी योग शक्ति का अलौकिक प्रभाव भी है जिससे यह अत्यधिक सकारात्मक ऊर्जा के साथ सक्रिय रूप से उत्तम प्रभाव को प्रदान करने वाला है।
शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति दिन में एक बार भी मां महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र का पाठ करता है, उसके जीवन में कोई खतरा/भय नहीं रहता और वह कभी नरक नहीं जाता। अर्थात उसके जीवन का जीते जी ही कल्याण हो जाता है।
स्तोत्र के रचयिता आदि शंकराचार्य
आदि शंकराचार्य, जिन्हें अक्सर आदि शंकराचार्य के रूप में जाना जाता है, हिंदू दर्शन में एक मौलिक व्यक्ति थे और अद्वैत वेदांत के एक प्रमुख प्रस्तावक थे, जो हिंदू धर्म में वेदांत दर्शन के मुख्य उप-विद्यालयों में से एक है। अद्वैत वेदांत, जो वेदों के “गैर-द्वैतवादी निष्कर्ष” का अनुवाद करता है, दावा करता है कि सच्चा आत्म, आत्मा, उच्चतम आध्यात्मिक वास्तविकता, ब्रह्म के समान है।
आठवीं शताब्दी ईस्वी के आसपास वर्तमान केरल, भारत में जन्मे, शंकर कम उम्र से ही अपनी विद्वता और आध्यात्मिक कौशल के लिए जाने जाते थे। उन्होंने उपनिषदों और अन्य हिंदू धर्मग्रंथों का अध्ययन करते हुए एक भटकते भिक्षु बनने के लिए कम उम्र में अपना घर छोड़ दिया।
शंकर हिंदू दर्शन के विभिन्न ग्रंथों पर अपनी टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने उपनिषदों, भगवद गीता और ब्रह्म सूत्र पर व्यापक टिप्पणियाँ लिखीं। इन कार्यों का हिंदू दर्शन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है और पूरे भारत में अद्वैत वेदांत दर्शन को समझाने और फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
शंकर ने भारत के चार कोनों में चार मठों (मठों) की भी स्थापना की, जिससे अद्वैत वेदांत के ऐतिहासिक विकास, पुनरुद्धार और प्रसार में सहायता मिली। ऐसा माना जाता है कि आदि शंकराचार्य की मृत्यु 32 वर्ष की आयु में हुई थी, फिर भी भारत की दार्शनिक परंपराओं और आध्यात्मिकता पर उनका प्रभाव बहुत अधिक है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि आदि शंकराचार्य को आधुनिक शंकराचार्यों के साथ भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए, जो आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित मठों के प्रमुख हैं और हिंदू धर्म के भीतर विभिन्न संप्रदायों के आध्यात्मिक नेता माने जाते हैं।
आदि शंकराचार्य ने अपने पूरे जीवन में पारंपरिक हिंदू मान्यताओं और प्रथाओं की रक्षा और पुनर्स्थापना का लक्ष्य रखा। उन्होंने कुछ विचारधाराओं की कर्मकांडीय प्रथाओं के विरुद्ध जमकर बहस की और अपने समय के दौरान लोकप्रिय विभिन्न धार्मिक मान्यताओं, जैसे बौद्ध धर्म और जैन धर्म की आलोचना कि और उनकी कमियों कि ओर ध्यान दिलाया।
उनके दर्शन का मुख्य पहलू, अद्वैत वेदांत, बौद्ध विचार और अन्य द्वैतवादी दर्शन के प्रभुत्व की प्रतिक्रिया थी जो परमात्मा और व्यक्तिगत स्व के बीच अंतर मानते थे। जवाब में, शंकर ने वास्तविकता का एक अद्वैतवादी (अद्वैत) दृष्टिकोण विकसित और प्रचारित किया, यह तर्क देते हुए कि व्यक्तिगत स्व और अंतिम वास्तविकता, या ब्रह्म, एक ही हैं।
इसे उपनिषदों के महान कथनों (महावाक्य) में से एक में संक्षेपित किया गया है: “तत् त्वम असि” या “आप वह हैं”, जिसमें “वह” ब्रह्म का संदर्भ देता है। शंकर के अनुसार, हमारे वास्तविक स्वरूप की अज्ञानता (अविद्या) दुख (संसार) का कारण है, और मुक्ति (मोक्ष) व्यक्तिगत स्व (आत्मान) और सार्वभौमिक स्व (ब्राह्मण) की एकता की प्राप्ति से प्राप्त होती है।
शंकर ने अपनी शिक्षाओं का प्रचार करने के तरीकों में एक कई भजनों और ग्रंथों की रचना की थी जो आज भी हिंदू धार्मिक प्रथाओं में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं। उदाहरण के लिए, उन्होंने विवेकचूड़ामणि (भेदभाव का शिखर रत्न), आध्यात्मिक पथ पर साधकों के लिए एक मैनुअल, और भज गोविंदम (गोविंदा की पूजा करें), एक लोकप्रिय भक्ति भजन की रचना की।
संक्षेप में, आदि शंकराचार्य को हिंदू दर्शन में एक महान व्यक्ति के रूप में सम्मानित किया जाता है। उनका अद्वैत वेदांत हिंदू धर्म में प्रमुख दार्शनिक विद्यालयों में से एक है, और उनकी शिक्षाएं दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रेरित और मार्गदर्शन करती रहती हैं। हिंदू धर्म को एकजुट करने और पुनर्जीवित करने के उनके प्रयासों का धर्म और समग्र रूप से भारतीय संस्कृति पर स्थायी प्रभाव पड़ा है।
बूंदें भी तो आये नहीं बाज़ यहाँ हाय साज़िश में शामिल सारा जहां है
हर ज़र्रे ज़र्रे की ये इल्तिज़ा है
ओ रे पिया
ओ रे पिया हाय ओ रे पिया हाय ओ रे पिया
नी रे रे रे ग ग ग म म म प प म ग रे सा सा रे रे सा ग ग रे म म ग प प म ध ध प नि नि सा सा प प सा म प ध नि सा नि रे नि सा सा सा
नज़रें बोलें दुनिया बोले दिल की ज़बाँ हाय दिल की ज़बाँ
इश्क मांगे इश्क चाहे कोई तूफां हाय
चलना आहिस्ते इश्क नया है पहला ये वादा हमने किया है
ओ रे पिया हाय ओ रे पिया हाय ओ रे पिया
पिया रे पिया
नंगे पैरों पे अंगारों चलती रही हाय चलती रही
लगता है कि गैरों में मैं पलती रही हाय
ले चल वहाँ जो मुल्क तेरा है जाहिल ज़माना दुश्मन मेरा है
ओ रे पिया हाय ओ रे पिया हाय ओ रे पिया हाय ओ रे पिया हाय ओ रे पिया हाय
ओ रे पिया ओ रे पिया
o re piya
o re piya lyrics in english
O re piya haye (x3)
Udne laga kyon man baawla re
Aaya kahan se yeh hosla re
O re piya haye (x2)
Tanabana tanabana bunti hawaa haaye bunti hawa
Boondein bhi to aaye nahi baaz yahan
Sagish mein shaamil sara jahan hai
Har zare zare ki yeh iltiza hai
O re Piya
O re Piya haye (x2)
O re Piya
ni re ,re re ga
ga ga ma
ma ma pa
pa ma ga re sa
sa re re sa
ga ga re
ma ma ga
pa pa ma
dha dha pa
ni ni sa sa pa
pa sa ma pa dha ni sa ni
re ni sa sa sa.. . . . ..
Nazrein bolen duniya bole
dil ki zaban haaye dil ki zubaan
Ishq maange ishq chahe koi toofan
Chalna aahiste ishq naya hai
Pehla yeh vada humne kiya hai
O re piya haaye (x2)
O re piya
Piyaaaaa….
yehhh piya
Nange pairo pe angaro
chalti rahi haaye chalti rahi
.l.y.r.i.c.s.m.a.s.t.i…c.o.m..
Lagta hai ke gairo mein
Palti rahi haaye
le chal wahan jo
Mulk tera hai
Jahil zamana
dushman mera hai
haaye
O re piya haye (x5)
About O Re Piya Song
आजा नचले एल्बम के ओ रे पिया गीत के बोल गाएं। आजा नचले एल्बम के ओ रे पिया गाने को मशहूर गायक राहत फतेह अली खान ने आवाज दी है। आजा नचले एल्बम के ओ रे पिया गाने के बोल जयदीप साहनी ने लिखे हैं।