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 चाणक्यनीतिदर्पण 5.2

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ पंचमोऽध्यायः ॥ 5 ॥

atha paṁcamō’dhyāyaḥ ॥ 5 ॥

मूर्खाणांपंडिताद्वेष्या अधनानांमहाधनाः ॥ 
दुर्भगाणांचसुभगाःकुलटानांकुलांगनाः॥६॥

अर्थ - मूर्ख पंडितों से, दरिद्री धनिकों से, व्यभिचारिणी कुलस्त्रियों से, और विधवा सुहागिनियों से बुरा मानती हैं अर्थात् यह सामान्य स्वभाव होता है ॥ ६ ॥

mūrkhāṇāṁpaṁḍitādvēṣyā adhanānāṁmahādhanāḥ ॥ 
durbhagāṇāṁcasubhagāḥkulaṭānāṁkulāṁganāḥ॥6॥

Meaning - She feels bad against foolish scholars, poor rich people, adulterous noblewomen and widows against married women, that is, it is their normal nature. ।। 6॥

आलस्योपहताविद्या पर हस्तेगतंधनम् ॥ 
अल्पबीजंदतंक्षेत्रं हतंसैन्यमनायकम् ॥ ७ ॥

अर्थ - आलस्यसे विद्या नष्ट हो जाती है, दूसरे के हाथ में जाने से धन निरर्थक हो जाता है, बीज की न्यूनता से खेत नष्ट हो जाता है, सेनापति के बिना सेना नष्ट हो जाती है ॥ ७॥

ālasyōpahatāvidyā para hastēgataṁdhanam ॥ 
alpabījaṁdataṁkṣētraṁ hataṁsainyamanāyakam ॥ 7 ॥

Meaning - Knowledge is destroyed due to laziness, wealth becomes worthless if it goes into someone else's hands, fields are destroyed due to lack of seeds, and an army is destroyed without a commander.  ।।7॥

अभ्यासादार्यतेविद्याकुलंशीलेन धार्यते ॥ 
गुणेनज्ञायतेत्वार्यः कोपोनेत्रेणगम्यते ॥ ८ ॥

अर्थ - अभ्यास से विद्या, सुशीलता से कुल, गुण से भला मनुष्य और नेत्र से कोप ज्ञात होता है ॥८॥

abhyāsādāryatēvidyākulaṁśīlēna dhāryatē ॥ 
guṇēnajñāyatētvāryaḥ kōpōnētrēṇagamyatē ॥ 8 ॥

Meaning - Knowledge is known through practice, family is known through kindness, a good person is known through qualities and anger is known through eyes.।।8।।

बित्तेनरक्ष्यतेधर्मोविद्यायोगेनरक्ष्यते ॥ 
मृदुनारक्ष्यतेभूपःसत्त्रियारक्ष्यतेगृहम्॥ ९॥

अर्थ - धन से धर्म की रक्षा होती है, यम नियम आदि योग से ज्ञान रक्षित होता है, मृदुता से राजा की रक्षा होती है, सच्ची स्त्री से घरकी रक्षा होती है ॥ ९ ॥

bittēnarakṣyatēdharmōvidyāyōgēnarakṣyatē ॥ 
mr̥dunārakṣyatēbhūpaḥsattriyārakṣyatēgr̥ham॥ 9॥

Meaning - Dharma is protected by wealth, knowledge is protected by Yama Niyama etc. Yoga, king is protected by softness, home is protected by a true woman.  ।।9॥

अन्यथा वेदपाण्डित्यंशास्त्रमाचारमन्यथा ॥ 
अन्यथा यद्वदन्शांतंलोकाःक्लिश्यन्तिचान्यथा ॥ 10॥

अर्थ - वेद के पांडित्य को व्यर्थ प्रकाश करने वाला, शास्त्र और उसके आचार के विषय में व्यर्थ विवाद करनेवाला, शांँत पुरुषों को अन्यथा कहनेवाला, ये लोग व्यर्थ ही क्लेश उठाते हैं ॥ १० ॥

anyathā vēdapāṇḍityaṁśāstramācāramanyathā ॥ 
anyathā yadvadanśāṁtaṁlōkāḥkliśyanticānyathā ॥ 10॥
Meaning - Those who uselessly expose the wisdom of the Vedas, those who make pointless disputes about the scriptures and their conduct, those who say otherwise to peaceful people, these people suffer in vain.  ।।10 ॥
ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय – 5   श्लोक-  6-10

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

 चाणक्यनीतिदर्पण 5.1

चाणक्यनीतिदर्पण -चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ पंचमोऽध्यायः ॥ 5 ॥

atha paṁcamō’dhyāyaḥ ॥ 5 ॥

पतिरेवगुरुः स्त्रीणांसर्वस्याभ्यागतोगुरुः ॥ 
गुरुर निर्द्विजातीनां वर्णानां ब्राह्मणे गुरुः ॥ १ ॥

अर्थ - स्त्री का गुरु पति ही है, अभ्यागत सबका गुरु है, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, इनका गुरु अग्नि है और चारों वर्णों में गुरु ब्राह्मण है ॥ १०॥

patirēvaguruḥ strīṇāṁsarvasyābhyāgatōguruḥ ॥ 
gurura nirdvijātīnāṁ varṇānāṁ brāhmaṇē guruḥ ॥ 1 ॥

Meaning - Husband is the guru of a woman, guest is the guru of all, Brahmin, Kshatriya, Vaishya, their guru is Agni and in all four varnas the guru is Brahmin.  ।।10॥

यथाचतुर्भिःकन कंपरीक्ष्यतेनिघर्षणच्छेदनता पताडनैः । 
तथाचतुर्भिःपुरुषःपरीक्ष्यतेत्यागेन शीलेनगुणेनकर्मणा ॥ २ ॥

अर्थ - घिसना, काटना, तपाना, पीटना इन चार प्रकारों से जैसे सोने की परीक्षा की जाती है, वैसे ही दान, शील, गुण और आचार इन चारों प्रकार से पुरुष की भी परीक्षा की जाती है ॥ २ ॥

yathācaturbhiḥkana kaṁparīkṣyatēnigharṣaṇacchēdanatā patāḍanaiḥ | 
tathācaturbhiḥpuruṣaḥparīkṣyatētyāgēna śīlēnaguṇēnakarmaṇā ॥ 2 ॥
Meaning - Just as gold is tested in these four ways - rubbing, cutting, heating and beating, similarly a man is also tested in these four ways - charity, modesty, qualities and conduct.  ।।2॥

तावद्भयेषुभेतव्यंथावद्भयमनागतम् ॥ 
आगतंतुभयं दृष्ट्वा प्रहर्तव्यमशंकया ॥ ३ ॥

अर्थ - तब तक ही भयों से डरना चाहिये, जब तक भय नहीं आया अर्थात् भयानक परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई, और आये हुये भय को देखकर प्रहार करना उचित है अर्थात्  विकट परिस्थितियों के उत्पन्न हो जाने पर पूरी आक्रामकता और निर्भयता से उनका सामना करना चाहिए॥ ३ ॥

tāvadbhayēṣubhētavyaṁthāvadbhayamanāgatam ॥ 
āgataṁtubhayaṁ dr̥ṣṭvā prahartavyamaśaṁkayā ॥ 3 ॥
Meaning - One should be afraid of fears only until the fear has come, that is, a terrible situation has not arisen, and it is appropriate to attack after seeing the fear that has come, that is, when dire situations arise, one should face them with complete aggression and fearlessness. ।। 3॥

एकोदर समुद्भूताए कनक्षत्रजातकाः ॥ 
नभवंतिसमाःशीलैर्यथावदरिकंटकाः ॥ ४ ॥

अर्थ - एक ही गर्भ से उत्पन्न और एक ही नक्षत्र में जन्म लेने वाले भी शील से समान नहीं होते। जैसे बेर और उसके कांँटे ॥ ४ ॥

ēkōdara samudbhūtāē kanakṣatrajātakāḥ ॥ 
nabhavaṁtisamāḥśīlairyathāvadarikaṁṭakāḥ ॥ 4 ॥
Meaning: Even those born from the same womb and in the same constellation are not equal in morality.  Like the plum and its thorns. ।। 4॥

निःस्पृहोनाधिकारीस्यान्नाकामामंडनप्रियः॥ 
नाविदग्धःप्रियंब्रूयात्स्पष्टवक्तानवंचकः ॥५॥

अर्थ - जिसको किसी विषय की इच्छा न होगी, वह किसी विषय का अधिकार नहीं होगा अर्थात् उस पर कोई भी विषय अपना अधिकार स्थापित नहीं कर सकेगा, जो कामी नहीं होगा, वह शरीर की शोभा करनेवाली वस्तुओं में (अत्यधिक और बनावटी फैशन में) प्रीति नहीं रखेगा; जो चतुर नहीं होगा, वह प्रिय नहीं बोल सकेगा और स्पष्ट कहने वाला छली (कपटी) नहीं होगा ॥ ५ ॥

niḥspr̥hōnādhikārīsyānnākāmāmaṁḍanapriyaḥ॥ 
nāvidagdhaḥpriyaṁbrūyātspaṣṭavaktānavaṁcakaḥ ॥5॥

Meaning - One who does not desire any subject, will not have the right to any subject, that is, no subject will be able to establish his authority over him, one who is not lustful, will be fond of things that adorn the body (in an excessive and artificial fashion).  Will not keep;  One who is not clever will not be able to speak dearly and the one who speaks clearly will not be deceitful.  ।।5॥
ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय – 5   श्लोक-  1-5

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

 चाणक्यनीतिदर्पण 4.4

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ चतुर्थोऽध्यायः ॥ 4 ॥

atha caturthō’dhyāyaḥ ॥ 4 ॥

त्यजेत्धर्मंदयाहीनाविद्याहीनं गुरुंत्यजेत् ॥ 
त्यजेत्क्रोधमुखीं भार्यांनिस्नेहान्बांधवात्यजेत्।। १६।।

अर्थ -  दयारहित धर्म को छोड़ देना चाहिये, विद्या विहीन गुरु का त्याग उचित है, जिसके मुंँह से क्रोध प्रगट होता हो, ऐसी भार्या को अलग करना चाहिये और बिना प्रीति बांँधवों का त्याग विहित है ॥ १६ ॥

tyajēḍarmaṁdayāhīnāvadyāhīnaṁ guruṁtyajēt ॥ 
tyajētkrōdhamukhīṁ bhāryāṁnisnēhānbāṁdhavātyajētū 16

Meaning - Religion without mercy should be abandoned, it is appropriate to sacrifice a Guru without knowledge, whose mouth shows anger, such a wife should be separated and it is prescribed to sacrifice those without loving ties. 
।। 16 ॥
अध्वा जरा मनुष्याणां वाजिनांबन्धनं जरा ।
अमैथुनं जरा स्त्रीणां वस्त्राणाम् आतपो जरा ।।

अर्थ - मनुष्यों के लिए पैदल न चलना, घोड़ों को बाँधकर रखना, स्त्रियों के लिए असम्भोग (मैथुन न करना) और वस्त्रों के लिए धूप जरा (बुढापा) लाने का कारण होता है।

abhyājarāmanuṣyāṇāṁ vājināṁbandhanaṁjarā ॥ 
amathunaṁ jarāstrīṇāṁ vastrāṇāmātapōjarā ॥17॥

Meaning - For humans, not walking on foot, keeping horses tied, for women it causes asambhog (not having sex) and for clothes, sunlight causes aging.
।।17।।

कःकालःकानिमित्राणिकोदेशः कौव्ययागमौ 
कस्याहं का चमेशक्तिरितिचिंत्यंमुहुर्मुहुः॥१८॥

अर्थ - किस काल में क्या करना चाहिये, मित्र कौन है, देश कौन है, लाभ व्यय क्या है, किसका मैं हूंँ, मुझमें क्या शक्ति है इन सबका बार-बार विचार करना योग्य है ॥ १८ ॥

kaḥkālaḥkānimitrāṇikōdēśaḥ kauvyayāgamau 
kasyāhaṁ kā camēśaktiriticiṁtyaṁmuhurmuhuḥ॥18॥

Meaning - What should be done at what time, who is the friend, who is the country, what is the profit and expenditure, whose am I, what power do I have, it is worth thinking about all these again and again.  ।।18 ॥

अग्निर्देवोद्विजातीनां मुनीनांहृदिदैवतम् ॥ 
प्रतिमास्वल्पबुद्दीनां सर्वत्रसमदर्शिनां ॥ १९ ॥

अर्थ - ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, (द्विजों का) उनका देवता आग्नि है। मुनियों के हृदय में देवता रहता है। अल्पबुद्धियों के लिये मूर्ति में और समदर्शियों के लिये सभी स्थानों में देवता है ॥१९॥

agnirdēvōdvijātīnāṁ munīnāṁhr̥didaivatam ॥ 
pratimāsvalpabuddīnāṁ sarvatrasamadarśināṁ ॥ 19 ॥

Meaning - Brahmins, Kshatriyas, Vaishyas, (dwijas) their god is Agni.  God resides in the hearts of sages.  For the less intelligent, there are gods( The habitats of the heaven or swarga called devta) in idols and for the wise, there are gods( The habitats of the heaven or swarga called devta) everywhere. ।।१९।।
इति चतुर्थोऽध्यायः ॥ 4 ॥
iti caturthō’dhyāyaḥ ॥ 4 ॥
ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय – 4   श्लोक-  16-20

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

 चाणक्यनीतिदर्पण 4.3

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ चतुर्थोऽध्यायः ॥ 4 ॥

atha caturthō’dhyāyaḥ ॥ 4 ॥

ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय – 4   श्लोक-  11-15
सकृज्जल्पन्तिराजानः सकृज्जल्पंतिपंडिताः ॥ 
सकृत्कन्याःप्रदीयन्तेत्रीण्येतानिसकृत्सकृत् ।।४.११।।

अर्थ - राजा लोग एक ही बार आज्ञा देते हैं, पंडित लोग एक ही बार बोलते हैं, कन्या का दान एक ही बार होता है ये तीनों बात एक बार ही होती हैं ॥ ११ ॥

sakr̥jjalpantirājānaḥ sakr̥jjalpaṁtipaṁḍitāḥ ॥ 
sakr̥tkanyāḥpradīyantētrīṇyētānisakr̥tsakr̥t ॥4.11॥

Meaning - Kings give orders only once, scholars speak only once, marriage of a girl takes place only once, all three things happen only once.  ।।4.11 ॥

एकाकिनां तपोद्वाभ्यां पठनंगापनंत्रिभिः ॥ 
चतुर्भिगमनं क्षेत्रंपंचभिर्बहुभीरणम् ॥ १२ ॥

अर्थ - अकेले में तप, दो से पढना, तीन से गाना, चार से पन्थ में चलना, पांँच से खेती और बहुतों से युद्ध भलीभांति से बनते हैं ॥ १२ ॥

ēkākināṁ tapōdvābhyāṁ paṭhanaṁgāpanaṁtribhiḥ ॥ 
caturbhigamanaṁ kṣētraṁpaṁcabhirbahubhīraṇam ॥ 12 ॥

Meaning - Penance is done well with one, study with two, singing with three, following a sect with four, farming with five and war with many. ।। 12 ॥

साभार्यायाशुचिर्दक्षासाभार्यायापतिब्रता ॥ 
साभार्यापतिप्रीता साभार्यासत्यवादिनी ॥१३॥

अर्थ - वही भार्या है, जो पवित्र और चतुर हो, वही भार्या है; जो पतिव्रता है वही भार्या है; जिस पर पति की प्रीति है। वही भार्या है; जो सत्य बोलती है अर्थात् दान मान पोषण पालन के योग्य है ॥ १३ ॥

sābhāryāyāśucirdakṣāsābhāryāyāpatibratā ॥ 
sābhāryāpatiprītā sābhāryāsatyavādinī ॥13॥

Meaning - Only the one who is pure and clever is a wife; she is a wife;  The one who is devoted to her husband is a wife;  On whom her husband is in love.  She is the wife;  One who speaks the truth means one who is worthy of charity, respect and nurture. ।। 13 ॥

अपुत्रस्यगृहंशून्यदिशःशून्यास्त्ववाधवः ॥ 
मूर्खस्थहृदयंशून्यं सर्वशून्यादरिद्रता ॥ १४ ॥

अर्थ - निपुत्री(वांझ) का घर सूना है, बन्धुरहित दिशा शून्य है। मूर्ख का हृदय शून्य है। और सर्व शून्य दारिद्रता है ॥ १४ ॥

aputrasyagr̥haṁśūnyadiśaḥśūnyāstvavādhavaḥ ॥ 
mūrkhasthahr̥dayaṁśūnyaṁ sarvaśūnyādaridratā ॥ 14 ॥

Meaning - The house of a daughter-in-law is desolate, the direction without any brother is void.  The heart of a fool is void.  And there is zero poverty.  ।।14 ॥

अनभ्यासेविषशास्त्रमजीर्णे भोजनंविषम् ॥ 
दरिद्रस्यविषंगोष्ठीवृद्धस्यतरुणीविषम् ॥ १५ ॥

अर्थ - बिनाभ्यास से शास्त्र विष हो जाता है, बिना पचे भोजन विष हो जाता है, दरिद्र को गोष्ठी विष और वृद्ध को युवती विष जान पड़ती है ॥ १५ ॥

anabhyāsēviṣaśāstramajīrṇē bhōjanaṁviṣam ॥ 
daridrasyaviṣaṁgōṣṭhīvr̥ddhasyataruṇīviṣam ॥ 15 ॥

Meaning - Without practice, scriptures become poison, undigested food becomes poison, seminary becomes poison to a poor and a girl becomes poison to an old man. ।। 15 ।।

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।


 चाणक्यनीतिदर्पण 4.2

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ चतुर्थोऽध्यायः ॥ 4 ॥

atha caturthō’dhyāyaḥ ॥ 4 ॥

ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय – 4   श्लोक-  6-10
एकोऽपिगुणवान्पुत्रोनिर्गुणैश्वशतैर्वरः ॥ 
एक श्चंद्रस्तमोहंतिनचताराः सहस्रशः ॥ ६ ॥

अर्थ - एक भी गुणी पुत्र श्रेष्ठ है। सो सैकड़ों गुण- रहितों से क्या ? एक ही चन्द्र अन्धकार को नष्ट कर देता है, सहस्त्र तारे नहीं ॥ ६ ॥

ēkō’piguṇavānputrōnirguṇaiśvaśatairvaraḥ ॥ 
ēka ścaṁdrastamōhaṁtinacatārāḥ sahasraśaḥ ॥ 6 ॥

Meaning- Even a virtuous son is the best.  So what about hundreds of people without qualities?  Only one moon destroys darkness, not thousands of stars.  ।।6॥

मूर्खश्चिरायुर्जातो ऽपितस्माज्जातमृतोवरः ॥ 
मृतः सचाल्दुःखाययावज्जीवंजडोदहेत्॥७॥

अर्थ - मूर्ख जातक चिरंजीवी हो उससे उत्पन्न होते ही  जो मर गया  वह श्रेष्ठ है। इस कारण कि मरा थोड़े ही  दुःख का कारण होता है। जड़ जब तक जीता है तब तक  दुःख देता रहता है ॥ ७ ॥

mūrkhaścirāyurjātō ’pitasmājjātamr̥tōvaraḥ ॥ 
mr̥taḥ sacālduḥkhāyayāvajjīvaṁjaḍōdahēt॥7॥

Meaning - A foolish person may live long and the one who dies as soon as he is born is the best.  Because dying is a cause of little sorrow.  As long as the root lives, it continues to give pain.  7 ॥

कुग्रामवासः कुलहीनसेवाकुभोजनंक्रोधमुखी चभार्य्या ।। 
पुत्रश्वमूर्खाविधवाचकन्याविनाग्नि नाषट् प्रदर्हतिकायम् ॥ ८ ॥
अर्थ - कुग्राम में बास, नीच कुलकी सेवा, कुभोजन, कलही स्त्री, मूर्ख पुत्र, विधवा कन्या ये छः बिना आग ही शरीर को जलाते हैं ॥ ८ ॥

kugrāmavāsaḥ kulahīnasēvākubhōjanaṁkrōdhamukhī cabhāryyā ॥ 
putraśvamūrkhāvidhavācakanyāvināgni nāṣaṭ pradarhatikāyam ॥ 8 ॥

Meaning - Living in a bad village, serving a lowly family, bad food, a bad woman, a foolish son, a widowed daughter, these six burn the body without fire. ।। 8॥

किंतयाक्रियतेधे-वाणनदेोग्ध्रीनगुर्विणी ॥ 
कोऽर्थः पुत्रेणजातेन योनविद्वान्नभक्तिमान्। ९।

अर्थ - उस गाय से क्या लाभ है जो न दूध देवे, न गाभिन होवे, और ऐसे पुत्र हुए से क्या लाभ जो न विद्वान् भया न भक्तिमान् ॥ ६ ॥

kiṁtayākriyatēdhē-vāṇanadēōgdhrīnagurviṇī ॥ 
kō’rthaḥ putrēṇajātēna yōnavidvānnabhaktimān.।।9।।

Meaning: What is the benefit of a cow that does not give milk and is not pregnant, and what is the benefit of having a son who is neither learned nor fearful nor devout?  ।।9 ॥

संसारतापदग्धानात्रयोविश्रांतिहेतवः ॥ 
अपत्यंचकलत्रंचसतांसंगतिरेवच ॥ १० ॥

अर्थ - संसार के ताप से जलते हुए पुरुषों के विश्राम के हेतु तीन हैं, पुत्र, स्त्री और सज्जनों की संगति ॥५०॥
saṁsāratāpadagdhānātrayōviśrāṁtihētavaḥ ॥ 
apatyaṁcakalatraṁcasatāṁsaṁgatirēvaca ॥ 10 ॥

Meaning - There are three ways for men who are burning with the heat of the world to find solace: sons, women and the company of gentlemen. ।।10।।

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।


 चाणक्यनीतिदर्पण 4.1

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ चतुर्थोऽध्यायः ॥ 4 ॥

atha caturthō’dhyāyaḥ ॥ 4 ॥

आयुःकर्मचवित्तंचविद्यानिधनमेवच ॥ 
पंचैतानिहिसृज्यन्ते गर्भस्थस्यैवदेहिनः ॥१॥

अर्थ - यह निश्चय है कि, आयु, कर्म, धन, विद्या और मरण ये पाँचों जब जीव गर्भ मे ही रहता है तब ही निश्चित हो जाता है ॥ १ ॥

āyuḥkarmacavittaṁcavidyānidhanamēvaca ॥ 
paṁcaitānihisr̥jyantē garbhasthasyaivadēhinaḥ ॥1॥

Meaning - It is certain that age, work, wealth, knowledge and death become certain only when the living being remains in the womb. ।। 1॥

साधुभ्यस्तेनिवर्तन्तेपुत्रामित्राणिबांधवाः ॥ 
येचतैःसहगंतारस्तद्धर्मात्सुकृतंकुलम् ॥ २ ॥

अर्थ - पुत्र, मित्र, बन्धु ये साधु जनों से निवृत हो जाते हैं और जो उनका संग करते हैं उनके पुण्य से उनका कुल सुक्कृती हो जाता है ॥ २ ॥

sādhubhyastēnivartantēputrāmitrāṇibāṁdhavāḥ ॥ 
yēcataiḥsahagaṁtārastaddharmātsukr̥taṁkulam ॥ 2 ॥
Meaning - Sons, friends, brothers, these saints retire from the people and due to the good deeds of those who associate with them, their family becomes prosperous. ।। 2॥

दर्शनध्यान संस्पर्शेर्मत्सीकूर्मीचपक्षिणी ॥ 
शिशुपालयतेनित्यंतथा सज्जनसंगतिः ॥ ३ ॥

अर्थ - मछली कंछुई (कछवी)और पक्षी ये दर्शन ध्यान और स्पर्शसे जैसे बच्चों को सर्वदा पालतीं हैं वैसे ही सज्जनों की संगति है॥ ३ ॥

darśanadhyāna saṁsparśērmatsīkūrmīcapakṣiṇī ॥ 
śiśupālayatēnityaṁtathā sajjanasaṁgatiḥ ॥ 3 ॥

Meaning - These darshan of fish, turtle (Kachvi) and birds always nurture children with attention and touch, in the same way, they are the company of good people. ।। 3॥

यावत्स्वस्थोह्ययंदेहोयावन्मृत्यु श्वदूरतः ॥ 
तावदात्महितं कुर्यात्प्राणांतेकिं करिष्यति ॥४॥
अर्थ - जब तक देह निरोग है और तब लग मृत्यु दूर है तत्पर्यंत अपना हित पुण्यादि करना उचित्त है प्राण के अंत हो जाने पर कोई क्या करेगा ॥ ४ ॥

yāvatsvasthōhyayaṁdēhōyāvanmr̥tyu śvadūrataḥ ॥ 
tāvadātmahitaṁ kuryātprāṇāṁtēkiṁ kariṣyati ॥4॥
Meaning - As long as the body is healthy and death seems far away, till then it is appropriate to do good deeds etc. for one's own good. What will one do when one's life comes to an end? ।। 4॥

कामधेनुगुणा विद्याह्यकाले फलदायिनी ॥ 
प्रवासेमातृप्सदृशीविद्यागुप्तंधनं स्मृतम् ॥ ५ ॥

अर्थ - विद्या में कामधेनु के समान गुण हैं गुण हैं इस कारण कि अकाल में भी फल देती है विदेश में माता के समान है विद्या को गुप्त धन कहते हैं ॥ ५ ॥

kāmadhēnuguṇā vidyāhyakā lē phaladāyinī ॥ 
pravāsēmātr̥psadr̥śīvidyāguptaṁdhanaṁ smr̥tam ॥ 5 ॥
Meaning - Knowledge has the same qualities as Kamdhenu. It has the qualities because it gives fruits even in famine. It is like a mother in foreign countries. Knowledge is called hidden wealth. ।। 5॥
ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय – 4   श्लोक-  1-5

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

 चाणक्यनीतिदर्पण 3.5

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ तृतीयोऽध्यायः ॥ 3 ॥

atha tr̥tīyō’dhyāyaḥ ॥ 3 ॥

मूर्खायत्रनपूज्यंतेधान्यंयत्रसुसंचितम् ।। 
दाम्पत्यकलहोनास्तितत्रश्रीः स्वयमागता ।।२१।।

अर्थ - जहाँ  मूर्ख नहीं पूजे जाते, जहाँ  अन्न संचित रहता है और जहाँ  स्त्री पुरुष में कलह नहीं होता वहाँ अपने आप ही लक्ष्मी विराजमान रहती या समृद्धि का निवास रहता है ॥ २१ ॥ 

mūrkhāpatranapūjyaṁtēdhānyaṁyatrasusaṁcitam ॥ 
dāmpatyakalahōnāstitatraśrīḥ svayamāgatā |21|

Meaning - Where fools are not worshipped, where food is stored and where there is no discord between men and women, there Goddess Lakshmi automatically resides or resides in prosperity.  21 ॥

॥ इति तृतीयोऽध्यायः ॥ ३ ॥ 
॥ iti tr̥tīyō’dhyāyaḥ ॥ 3 ॥ 
ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय –  3 श्लोक-  21-22

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

 चाणक्यनीतिदर्पण 3.4

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ तृतीयोऽध्यायः ॥ 3 ॥

atha tr̥tīyō’dhyāyaḥ ॥ 3 ॥

एकेनापि सुपुत्रेणविद्यायुक्तेन साधुना ॥ 
आल्हादितं कुलं सर्वंयथा चंद्रेणशर्वरी ॥१६॥
अर्थ - विद्यायुक्त भला एक भी सुपुत्र से सारा कुल ऐसे आनंदित हो जाता है जैसे चंद्रमा से रात्रि ॥१६॥
ēkēnāpi suputrēṇavidyāyuktēna sādhunā ॥ 
ālhāditaṁ kulaṁ sarvaṁyathā caṁdrēṇaśarvarī ॥16॥

Meaning - Even if one son is knowledgeable, the entire clan becomes as happy as the moon makes the night ॥16॥
 ekēnāpi

किंजातैर्बहुभिः पुत्रैः शोकसंतापकारकैः ॥ 
वरमेकः कुलालंबी यत्रविश्राम्यतेकुलम्॥१७॥

अर्थ - शोक संताप करने वाले उत्पन्न बहुपुत्रों से क्या ? कुल को सहारा देने वाला एक ही पुत्र श्रेष्ठ है जिसमें कुल विश्राम पाता है॥ १७ ॥

kiṁjātairbahubhiḥ putraiḥ śōkasaṁtāpakārakaiḥ ॥ 
varamēkaḥ kulālaṁbī yatraviśrāmyatēkulam॥17॥

Meaning: What about the many sons born to mourners?  Only one son who supports the family is the best and in whom the family finds rest.  17 ॥

लालयेत्पञ्चवर्षाणिदशवर्षाणिताड्येत् ॥ 
प्राप्तेतुषोड्शेवर्षेपुत्रेमित्रत्वमाचरेत् ॥ १८ ॥

अर्थ - पुत्र को पांच वर्ष तक दुलारें, उपरांत दश वर्ष पर्यंत ताड़न करें(अर्थात आवश्यकता पड़ने पर उसे कठोरता से भी शिक्षा दें), सोलहवें वर्ष की प्राप्ति होने पर पुत्र में मित्र समान आचरण करें ॥ १८ ॥

lālayētpañcavarṣāṇidaśavarṣāṇitāḍyēt ॥ 
prāptētuṣōḍśēvarṣēputrēmitratvamācarēt ॥ 18 ॥

Meaning - Cherish your son for five years, after that, chastise him for ten years (that is, teach him harshly if necessary), behave like a friend when the son attains the age of sixteen.  18 ॥


उपसर्गेऽन्यचक्रैचदुर्भिक्षेचभयावहे ॥ 
असाधुजनसंपर्केयःपलातिसजीवति ॥१९॥

अर्थ - उपद्रव उठने पर, शत्रु के आक्रमण करने पर, भयानक अकाल पडने पर और खल जन के संग होने पर जो भागता है वह जीवित रहता है ॥ १९ ॥

upasargē’nyacakraicadurbhikṣēcabhayāvahē ॥ 
asādhujanasaṁparkēyaḥpalātisajīvati ॥19॥

Meaning - The one who runs away when trouble arises, when the enemy attacks, when there is a terrible famine and when he is in the company of evil people, remains alive.  ।।19 ॥
धर्मार्थकाममोक्षेषुयस्यकोऽपिनविद्यते । 
जन्मजन्मनि मर्येषु मरणंतस्य केवलम् ॥२०॥

अर्थ - धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इनमें से जिसको कोई भी उपलब्ध या सिद्ध न हुआ हो उसको मनुष्यों में जन्म लेने का फल केवल मरण ही हुआ ॥ २० ॥

dharmārthakāmamōkṣēṣuyasyakō’pinavidyatē | 
janmajanmani maryēṣu maraṇaṁtasya kēvalam ॥20॥

Meaning - For the one who has not achieved or achieved any of these - Dharma, Artha, Kama and Moksha, the only result of being born among humans is death. ।। 20 ॥
ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय –  3 श्लोक-16-20  

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

 चाणक्यनीतिदर्पण 3.3

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ तृतीयोऽध्यायः ॥ 3 ॥

atha tr̥tīyō’dhyāyaḥ ॥ 3 ॥

उद्योगेनास्तिदारिद्र्यंजपतोनास्तिपातकम् ॥ 
मौनेनकलहोनास्तिनास्ति जागारतेभयम् । ११।
अर्थ - उपाय करनेपर दरिद्रता नहीं रहती, जपने वाले को पाप नहीं रहता, मौन होने से कलह नहीं होता और जागने वाले के निकट भय नहीं आता ॥११॥

udyōgēnāstidāridryaṁjapatōnāstipātakam ॥ 
maunēnakalahōnāstināsti jāgāratēbhayam | 11|
Meaning - There is no poverty by doing the right thing, the one who chants has no sins, there is no discord by being silent and no fear comes near the one who is alert.॥11॥

अतिरूपेणवैसीता आतगर्वेणरावणः ॥ 
अतिदानाद्वलिर्वद्धोयति सर्वत्रवर्जयेत्॥१२॥

अर्थ - अति सुंदरता के कारण सीता हरी गई, अति गर्व से रावण मारा गया, बहुत दान देकर बलि को बंधना पडा; इस हेतु अति को सब स्थल में छोड देना चाहिये ॥ १२ ॥

atirūpēṇavaisītā ātagarvēṇarāvaṇaḥ ॥ 
atidānādvalirvaddhōyati sarvatravarjayēt॥12॥
Meaning - There is no poverty by doing the right thing, the one who chants has no sins, there is no discord by being silent and no fear comes near the one who is alert.॥11॥

कोहिभारःसमर्थानांकिंदुरं व्यवसायिनाम् ॥ 
कोविदेशः सुविद्यानांकः प्रियःप्रियवादिनाम्॥ 13 ॥

अर्थ - समर्थ को कौन वस्तु भारी है, काम में तत्पर रहने वाले को क्या दूर है सुन्दर विद्यावालों को कौन विदेश है, प्रियवादियों को अप्रिय कौन है ।

kōhibhāraḥsamarthānāṁkiṁduraṁ vyavasāyinām ॥ 
kōvidēśaḥ suvidyānāṁkaḥ priyaḥpriyavādinām॥ 13 ॥
Meaning - What is heavy for the capable, what is too far for the one who is ready to work, what is foreign to the learned, what is unpleasant to the dear litigants.


एकेनापिसुवृक्षेणपुष्पितेन सुगन्धिना ॥ 
वासितंतद्वनंसर्वं सुपुत्रेणकुलंयथा ॥ १४ ॥

अर्थ - एक भी अच्छे वृक्ष से जिसमें सुन्दर फूल और गन्ध है ऐसे सब वन सुवासित हो जाता है, जैसे सुपुत्र से कुल ॥ १४ ॥

ēkēnāpisuvr̥kṣēṇapuṣpitēna sugandhinā ॥ 
vāsitaṁtadvanaṁsarvaṁ suputrēṇakulaṁyathā ॥ 14 ॥
Meaning - Even a single good tree, which has beautiful flowers and fragrance, makes the whole forest fragrant, just as a clan becomes blessed with a son.  14 ॥

एकेन शुष्कवृक्षेण दह्यमानेन वह्निना। दह्यते तद्वनं सर्वं कुपुत्रेण कुलं यथा ॥ 15।।

अर्थ - आग से जलते हुये एक ही सूखे वृक्ष से वह सब वन ऐसे जल जाता है जैसे कुपुत्र से कुल ॥१५॥

ēkēna śuṣkavr̥kṣēṇa dahyamānēna vahninā| dahyatē tadvanaṁ sarvaṁ kuputrēṇa kulaṁ yathā ॥ 

Meaning - A single dry tree burning with fire burns the entire forest like an entire forest is burnt by an evil son.
ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय – 3 श्लोक- 11-15

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

 चाणक्यनीतिदर्पण 3.2

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ तृतीयोऽध्यायः ॥ 3 ॥

atha tr̥tīyō’dhyāyaḥ ॥ 3 ॥

ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय -3 श्लोक- 6-10
प्रलयेभिन्नमर्यादाभवन्तिकिलसागराः ॥ 
सागराभेदमिच्छान्तिप्रलये ऽपिनसाधवः ।॥६॥

अर्थ - समुद्र प्रलय के समय अपनी मर्यादा को छोड़ देते हैं और सागर भेद की इच्छा भी रखते हैं परन्तु साधु (सज्जन) लोग प्रलय होने पर भी अपनी मर्यादा को नहीं छोड़ते (अर्थात वे समुद्र से भी श्रेष्ठ हैं॥ ६ ॥

pralayēbhinnamaryādābhavantikilasāgarāḥ ॥ 
sāgarābhēdamicchāntipralayē ’pinasādhavaḥ ॥|6॥

Meaning - At the time of flood, the oceans give up their dignity and also wish to separate from the ocean, but sages (gentlemen) do not give up their dignity even when there is a flood (that is, they are better than the sea. ॥ 6 ॥

मूर्खस्तुपरिहर्तक्सःप्रत्यक्षोद्विपदःपशुः ॥ 
भिद्यत्तेवाक्यशल्येन अदृशंकंटकंयथा ॥ ७॥

अर्थ - मूर्ख को दूर करना उचित है, इस कारण कि, देखने में वह मनुष्य है; परन्तु यथार्थ में देखें तो दो पांव वाला पशु है। और वाक्यरूप कांटे को बेधता है जैसे अन्धे को कांटा ॥ ७ ॥
mūrkhastuparihartaksaḥpratyakṣōdvipadaḥpaśuḥ ॥ 
bhidyattēvākyaśalyēna adr̥śaṁkaṁṭakaṁyathā ॥ 7॥
Meaning - It is appropriate to remove a fool because, in appearance, he is a human being; But in reality it is a two-legged animal. And the sentence form pierces a thorn like a thorn pierces a blind man. 7 ॥

रूपयौवनसम्पन्नाविशालकुलसम्भवाः ॥ 
विद्याहीनानशोभन्तेनिर्गंधाइवकिंशुकाः॥८॥

अर्थ - सुंदरता, तरुणता और बडे कुल में जन्म इनके रहते भी विद्याहीन पुरुष बिना गन्ध पलाश (ढाक) के फूल के समान नहीं शोभते ॥ ८ ॥

rūpayauvanasampannāviśālakulasambhavāḥ ॥ 
vidyāhīnānaśōbhantēnirgaṁdhāivakiṁśukāḥ॥8॥
Meaning - Despite beauty, youth and birth in a big family, a man without education does not look as good as a flower without fragrance. 8॥

कोकिलानांस्वरोरूपंस्त्रीणांरूपंपतिव्रतम् ॥
विद्यारूपंकुरूपाणांक्षमारूपंतपस्विनाम् ॥९॥

अर्थ - कोकिलों की शोभा स्वर है, स्त्रियोंकी शोभा पातिव्रत है, कुरूपों की शोभा विद्या है, तपस्वियों की शोभा क्षमा है ॥ ९ ॥

kōkilānāṁsvarōrūpaṁstrīṇāṁrūpaṁpativratam ॥
vidyārūpaṁkurūpāṇāṁkṣamārūpaṁtapasvinām ॥9॥

Meaning - The beauty of nightingales is voice, the beauty of women is devotion, the beauty of ugly people is knowledge, the beauty of ascetics is forgiveness. 9॥


त्यजेदेकं कुलस्यार्थेग्रामस्यार्थेकुलंत्यजेत् ॥ 
ग्रामजनपदस्यार्थेआत्मार्थेपृथिवींत्यजेत्॥१०॥

अर्थ - कुल के निमित्त एक को छोड़ देना चाहिये, ग्राम के हेतु कुल का त्याग उचित है, देश-के अर्थ ग्राम का और अपने अर्थ पृथिवी का अर्थात् सबका त्याग ही उचित है ॥ १० ॥

tyajēdēkaṁ kulasyārthēgrāmasyārthēkulaṁtyajēt ॥ 
grāmajanapadasyārthēātmārthēpr̥thivīṁtyajēt॥10॥

Meaning - One should be sacrificed for the sake of the clan, it is appropriate to sacrifice the clan for the sake of the village, it is appropriate to sacrifice the country (meaning the village) and one's own meaning the earth i.e. sacrificing everything.  10 ॥

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

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