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 चाणक्यनीतिदर्पण – 6.1

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ षष्ठमोऽध्यायः ॥ 6 ॥

atha ṣaṣṭhamō’dhyāyaḥ ॥ 6 ॥

श्रुत्वाधर्मविजानातिश्रुत्वात्यजतिदुर्मतिम् ॥ 
श्रुत्वाज्ञानमवाभोतिश्रुत्वामोक्षमवाप्नुयात्॥१॥

अर्थ - मनुष्य शास्त्र को सुन कर धर्म को जानता है दुर्बुद्धि को छोडता है, ज्ञान पाता है मोक्ष पाता है॥१।।

śrutvādharmavijānātiśrutvātyajatidurmatim ॥ 
śrutvājñānamavābhōtiśrutvāmōkṣamavāpnuyāt॥1॥
Meaning - Man knows the religion by listening to the scriptures, gives up his foolishness, gets knowledge and attains salvation. ।।1.।।

काकःपक्षिषुचंडालःपशूनांचैवकुक्कुरः ॥ 
पापोमुनीनांचांडालः सर्वेषांचैवनिंदकः ॥ २ ॥

अर्थ - पक्षियों में, कौआ, और पशुओं में सियार (कृकुर) चांडाल होता है, मुनियों में चांडाल पाप है, और सबमें चांडाल निन्दक है ॥ २ ॥

kākaḥpakṣiṣucaṁḍālaḥpaśūnāṁcaivakukkuraḥ ॥ 
pāpōmunīnāṁcāṁḍālaḥ sarvēṣāṁcaivaniṁdakaḥ ॥ 2 ॥ 

Meaning - Among birds, crow, and jackal (Krikur) among animals, Chandal is there, among sages, Chandal is sinful, and among all, Chandal is a slanderer.  ।।2॥

भस्मनाशुड्यते कांस्यंताम्रमम्लैनशुद्ध्यति ॥ 
रजसाशुक्ष्यतेनारीनदीवेगेनशुद्ध्ययति ॥ ३ ॥

अर्थ - कांँसे का पात्र राख से, तांबे का मल खटाई से, स्त्री रजस्वला होने पर और नदी धारा के वेग से पवित्र होती है ॥ ३ ॥

bhasmanāśuḍyatē kāṁsyaṁtāmramamlainaśuddhyati ॥ 
rajasāśukṣyatēnārīnadīvēgēnaśuddhyayati ॥ 3 ॥

Meaning: A bronze vessel is purified by ashes, copper feces by sour water, a woman by menstruation and a river by the speed of the current.  ।।3॥

भ्रमन्संपूज्यतेराजाश्त्रमन्संपूज्यतेद्विजः ॥ 
भ्रमन् संपूज्यतेयोगीस्त्रीभ्रमन्तीविनश्यति ॥४॥

अर्थ - भ्रमण करने वाले राजा, ब्राह्मण, योगी पूजित होते हैं परंतु स्त्री घूमने से भ्रष्ट हो जाती है ॥४॥

bhramansaṁpūjyatērājāśtramansaṁpūjyatēdvijaḥ ॥ 
bhraman saṁpūjyatēyōgīstrībhramantīvinaśyati ॥4॥

Meaning - Kings, Brahmins and Yogis who travel are worshipped, but women get corrupted by travelling.॥4॥
यस्यार्थास्तस्यमित्राणियस्यार्थास्तस्यबान्धवाः 
यस्यार्थाः सपुमाँल्लोकेयस्यार्थः सचपंडितः॥५॥

अर्थ - जिसके पास धन है, उसी का मित्र, और उसी के बांधव होते हैं, और वही पुरुष गिना जाता है, और वही पंडित कहलाता है ॥ ५ ॥

yasyārthāstasyamitrāṇiyasyārthāstasyabāndhavāḥ 
yasyārthāḥ sapumām̐llōkēyasyārthaḥ sacapaṁḍitaḥ॥5॥

Meaning - The one who has money has friends and relatives, and he is considered a man, and he is called a Pandit.  ।।5॥
ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय – 6   श्लोक-  1-5

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

 चाणक्यनीतिदर्पण 5.5

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ पंचमोऽध्यायः ॥ 5 ॥

atha paṁcamō’dhyāyaḥ ॥ 5 ॥

नराणांनापितो धूर्तःपक्षिणांचैववायसः ॥ 
चतुष्पदांशृगालस्तुस्त्रीणांधूर्ताचमालिनी॥२१॥

अर्थ - पुरुषों में नापित, और पक्षियों में कौवा वंचक (धूर्त अर्थात् मूर्ख बनाने वाला) होता है, पशुओं में सियार धूर्त होता है और स्त्रियों में मालिन धूर्त होती है ॥ २१ ॥

narāṇānāpitō dhūrtaḥpakṣiṇāṁcaivavāyasaḥ ॥ 
catuṣpadāṁśr̥gālastustrīṇāṁdhūrtācamālinī॥21॥

Meaning - Among men, the crow is deceitful, among birds, the crow is deceitful (cunning i.e. one who fools), among animals, the jackal is cunning and among women, the dirty one is cunning. ।। 21 ॥

जनिताचोपनेताचयस्तुविद्यां प्रयच्छति ॥ 
अन्नदातांभयंत्रातांपंचैतेपितरः स्मृताः ॥२२॥

अर्थ - जन्म देने वाला, यज्ञोपवीत आदि संस्कार कराने वाला, विद्या देनेवाला (गुरु), अन्न देने वाला (अर्थात् भरण पोषण करनेवाला ) और भय से बचाने वाला, ये पांँचों पिता माने जाते हैं ॥२२॥

janitācōpanētā cayastuvidyāṁ prayacchati ॥ 
annadātāṁbhayatrātāpaṁcaitēpitaraḥ smr̥tāḥ ॥22॥

Meaning - The one who gives birth, the one who performs the rites of Yagyopavit etc., the one who gives knowledge (Guru), the one who gives food (i.e. the one who provides sustenance) and the one who protects from fear, these five are considered fathers. ।।२२।।

राजपत्नीगुरोःपत्नीमित्रपत्नीतथैवच ॥ 
पत्नीमातास्वमाताचपंचैतामातरः स्मृताः॥२३ ॥

अर्थ - राजा की भार्या, गुरु की स्त्री, वैसे ही मित्र की पत्नी, सास और अपनी जननी (माता) इन पांँचों को माता कहते हैं ॥ २३ ॥

rājapatnīgurōḥpatnīmitrapatnītathaivaca ॥ 
patnīmātāsvamātācapaṁcaitāmātaraḥ smr̥tāḥ॥23 ॥
Meaning - King's wife, Guru's wife, friend's wife, mother-in-law and own mother, these five are called mother.  ।।23॥
इतिपंचमोऽध्यायः ॥ 5 ॥
itipaṁcamō’dhyāyaḥ ॥ 5 ॥
ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय – 5   श्लोक-  20-23

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

 चाणक्यनीतिदर्पण 5.4

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ पंचमोऽध्यायः ॥ 5 ॥

atha paṁcamō’dhyāyaḥ ॥ 5 ॥

वृथादृष्टिःसमुदेषुटथातृप्तेषुभोजनम् ॥ 
वृथादानंधनाढ्येषुवृथादीपोदिवापि च॥ १६॥

अर्थ - समुद्रों में वर्षा वृथा है, और भोजन से तृप्त को भोजन निरर्थक़ है, धनी को धन देना व्यर्थ है और दिन में, दीप व्यर्थ है ॥ १६ ॥

vr̥thādr̥ṣṭiḥsamudēṣuṭathātr̥ptēṣubhōjanam ॥ 
vr̥thādānaṁdhanāḍhyēṣuvr̥thādīpōdivāpi ca॥ 16॥

Meaning - Rain in the oceans is useless, and food to the well-fed is useless, giving money to the rich is useless and lamps are useless during the day.  ।। 16 ॥

नास्तिमेघ समंतो यंनास्तिचात्मसमंबलम्ः ॥ 
नास्तिचक्षुः समंते जोनास्तिधान्यसमंप्रियम् ॥१७॥

अर्थ - मेघ के जल के समान दूसरा जल नहीं है, अपने बल के समान दूसरे का बल नहीं, क्योंकि वह समय पर काम आता है।  नेत्र के तुल्य दूसरा प्रकाश करने वाला नहीं है।  और अन्न के सदृश दूसरा प्रिय पदार्थ नहीं है. ॥ १७ ॥

nāstimēgha samaṁtō yaṁnāsticātmasamaṁbalamḥ ॥ 
nāsticakṣuḥ samaṁtē jōnāstidhānyasamaṁpriyam ॥17॥
Meaning - There is no other water like the water of the cloud, no other's strength is equal to your own strength, because it is useful at the right time.  There is no other source of light like the eye.  And there is no other thing as dear as food.  ।।  17 ॥

अधनी धनमिच्छन्तिवाचंचैवचतुष्पदाः ॥ 
मानवाः स्वर्गमिच्छंतिमोक्षमिच्छंतिदेवताः ।१८।

अर्थ - धनहीन धन चाहते हैं, और पशु वचन अर्थात् वे बोलने कि शक्ति चाहते हैं, मनुष्य स्वर्ग जाना चाहते हैं, और देवता मुक्ति की इच्छा रखते हैं ॥ १८ ॥

adharnā dhanamicchantivācaṁcaivacatuṣpadāḥ ॥ 
mānavāḥ svargamicchaṁtimōkṣamicchaṁtidēvatāḥ |18|

Meaning - The moneyless want wealth, and the animals want the power to speak, humans want to go to heaven, and the gods( The habitats of the heaven or swarga called devta) want salvation.  ।।18 ॥

सत्येनधार्यतेपृथ्वीसत्येनतपतेरविः ॥ 
सत्येंनवातिवायुश्चसर्वंसत्येप्रतिष्ठितम् ॥१९॥ 
अर्थ - सत्य से पृथ्वी स्थिर है, और सत्य ही से सूर्य तपते हैं, सत्य ही से वायु बहती है, सब सत्य ही से स्थिर है।॥ १९॥

satyēnadhāryatēpr̥thvīsatyēnatapatēraviḥ ॥ 
satyēṁnavātivāyuścasarvaṁsatyēpratiṣṭhitam ॥19॥

Meaning - The earth is stable due to truth, the sun shines due to truth, the wind blows due to truth, everything is stable due to truth only.  ।।19॥

चलालक्ष्मी श्वलाप्राणा श्वले जीवितमंदिरेः ॥ 
चलाचलेचसंसारेधर्मएको हिनिश्चलः ॥२०॥

अर्थ - लक्ष्मी नित्य नहीं है, प्राण, जीवन और घर ये सब स्थिर नहीं हैं, निश्चय है कि इस चराचरं संसार में केवल धर्म ही निश्चल है ॥ २० ॥

calālakṣmī śvalāprāṇā śvalē jīvitamaṁdirēḥ ॥ 
calācalēcasaṁsārēdharmēkō hiniścalaḥ ॥20॥

Meaning - Lakshmi is not eternal, life, life and home are not stable, it is certain that only religion is stable in this ever-changing world. ।। 20 ॥
ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय – 5   श्लोक-  16-20

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

 चाणक्यनीतिदर्पण 5.3

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ पंचमोऽध्यायः ॥ 5 ॥

atha paṁcamō’dhyāyaḥ ॥ 5 ॥

दारिद्रयनाशनंदानंश्रीलंदुर्गतिनाशनं ॥ 
अज्ञाननाशिनीप्रज्ञाभावनाभयनाशिनी ॥११॥

दान दरिद्रता का नाश करता है सुशीलता दुर्गति का, बुद्धि अज्ञान का और भक्ति भय का नाश करती है ॥ ११ ॥

dāridrayanāśanaṁdānaṁśrīlaṁdurgatināśanaṁ ॥ 
ajñānanāśinīprajñābhāvanābhayanāśinī ॥11॥

Charity destroys poverty, kindness destroys misery, intelligence destroys ignorance and devotion destroys fear.  11 ॥

नास्तिकामसमोव्याधिर्नास्तिमोहसमोरिपुः ।। 
नास्तिकोपसमोबह्निर्नास्तिज्ञानात्परंसुखम् १२

अर्थ - कामासक्ति के समान दूसरी व्याधि नहीं है, अज्ञान के समान दूसरा बैरी नहीं है, क्रोध के तुल्य दूसरी आग नहीं है, ज्ञान से परे कोई भी सुख नहीं है ॥ १२॥ 

nāstikāmasamōvyādhirnāstimōhasamōripuḥ ॥ 
nāstikōpasamōbahnirnāstijñānātparaṁsukham 12

Meaning - There is no other disease like lust, there is no other enemy like ignorance, there is no other fire like anger, there is no happiness beyond knowledge. ।। 12॥

जन्ममृत्युद्दियात्ये कोभुनत्ये कःशुभाशुभम् ॥ 
नर केषुपतत्येकएको यातिपराङ्गतिम्॥१३ ॥

अर्थ - यह निश्चय है कि एक ही पुरुष (स्वयं ही) जन्म-मरण पाता है। सुख दुःख एक ही भोगता है एक ही नरकों में पड़ता है और एक ही मोक्ष पाता है, अर्थात् इन कामों में कोई किसी कि सहायता नहीं कर सकता ॥१३॥

janmamr̥tyuddiyātyē kōbhunatyē kaḥśubhāśubham ॥ 
nara kēṣupatatyēkēkō yātiparāṅgatim॥13 ॥

Meaning - It is certain that only one person (himself) experiences birth and death.  Only one experiences happiness and sorrow, only one falls into hell and only one attains salvation, that is, no one can help anyone else in these tasks.।।13॥

तृणंब्रह्मविदःस्वर्गंतणंसूरस्पजीवितं ॥ 
जिताक्षस्यतृणंनारीनिस्टहस्पतृणं जगत् ॥१४॥

अर्थ - ब्रह्मज्ञानी को स्वर्ग तृण समान है, शूर को जीवन तृण है, जिसने इन्द्रियों को वश किया उसे स्त्री तृण के तुल्य जान पड़ती है, निस्पृह को जगत् तृण के समान हो जाता है॥ १४ ॥

tr̥ṇaṁbrahmavidaḥsvargaṁtaṇaṁsūraspajīvitaṁ ॥ 
jitākṣasyatr̥ṇaṁnārīnisṭahaspatr̥ṇaṁ jagat ॥14॥

Meaning - To a wise man, heaven is like a straw, to a brave man, life is like a straw, to one who has controlled his senses, a woman seems like a straw, to a disinterested person the world seems like a straw. ।। 14 ॥

विद्यामित्रंप्रवासेषुभार्यामित्रंग्गृद्देषु च ॥ 
व्याधितस्यौषधंमित्रंधर्मोमित्रंमृतस्य च॥१५॥

अर्थ - विदेश में विद्या मित्र होती है, गृह में भार्या मित्र है, रोगी का मित्र औषध है और मरे का मित्र धर्म है ॥ १५ ॥

vidyāmitraṁpravāsēṣubhāryāmitraṁggr̥ddēṣu ca ॥ 
vyādhitasyauṣadhaṁmitraṁdharmōmitraṁmr̥tasya ca॥15॥

Meaning - Knowledge is a friend abroad, wife is a friend at home, medicine is the friend of the sick and religion is the friend of the dead.  ।।15।।

ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय – 5   श्लोक-  11-15

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

 चाणक्यनीतिदर्पण 5.2

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ पंचमोऽध्यायः ॥ 5 ॥

atha paṁcamō’dhyāyaḥ ॥ 5 ॥

मूर्खाणांपंडिताद्वेष्या अधनानांमहाधनाः ॥ 
दुर्भगाणांचसुभगाःकुलटानांकुलांगनाः॥६॥

अर्थ - मूर्ख पंडितों से, दरिद्री धनिकों से, व्यभिचारिणी कुलस्त्रियों से, और विधवा सुहागिनियों से बुरा मानती हैं अर्थात् यह सामान्य स्वभाव होता है ॥ ६ ॥

mūrkhāṇāṁpaṁḍitādvēṣyā adhanānāṁmahādhanāḥ ॥ 
durbhagāṇāṁcasubhagāḥkulaṭānāṁkulāṁganāḥ॥6॥

Meaning - She feels bad against foolish scholars, poor rich people, adulterous noblewomen and widows against married women, that is, it is their normal nature. ।। 6॥

आलस्योपहताविद्या पर हस्तेगतंधनम् ॥ 
अल्पबीजंदतंक्षेत्रं हतंसैन्यमनायकम् ॥ ७ ॥

अर्थ - आलस्यसे विद्या नष्ट हो जाती है, दूसरे के हाथ में जाने से धन निरर्थक हो जाता है, बीज की न्यूनता से खेत नष्ट हो जाता है, सेनापति के बिना सेना नष्ट हो जाती है ॥ ७॥

ālasyōpahatāvidyā para hastēgataṁdhanam ॥ 
alpabījaṁdataṁkṣētraṁ hataṁsainyamanāyakam ॥ 7 ॥

Meaning - Knowledge is destroyed due to laziness, wealth becomes worthless if it goes into someone else's hands, fields are destroyed due to lack of seeds, and an army is destroyed without a commander.  ।।7॥

अभ्यासादार्यतेविद्याकुलंशीलेन धार्यते ॥ 
गुणेनज्ञायतेत्वार्यः कोपोनेत्रेणगम्यते ॥ ८ ॥

अर्थ - अभ्यास से विद्या, सुशीलता से कुल, गुण से भला मनुष्य और नेत्र से कोप ज्ञात होता है ॥८॥

abhyāsādāryatēvidyākulaṁśīlēna dhāryatē ॥ 
guṇēnajñāyatētvāryaḥ kōpōnētrēṇagamyatē ॥ 8 ॥

Meaning - Knowledge is known through practice, family is known through kindness, a good person is known through qualities and anger is known through eyes.।।8।।

बित्तेनरक्ष्यतेधर्मोविद्यायोगेनरक्ष्यते ॥ 
मृदुनारक्ष्यतेभूपःसत्त्रियारक्ष्यतेगृहम्॥ ९॥

अर्थ - धन से धर्म की रक्षा होती है, यम नियम आदि योग से ज्ञान रक्षित होता है, मृदुता से राजा की रक्षा होती है, सच्ची स्त्री से घरकी रक्षा होती है ॥ ९ ॥

bittēnarakṣyatēdharmōvidyāyōgēnarakṣyatē ॥ 
mr̥dunārakṣyatēbhūpaḥsattriyārakṣyatēgr̥ham॥ 9॥

Meaning - Dharma is protected by wealth, knowledge is protected by Yama Niyama etc. Yoga, king is protected by softness, home is protected by a true woman.  ।।9॥

अन्यथा वेदपाण्डित्यंशास्त्रमाचारमन्यथा ॥ 
अन्यथा यद्वदन्शांतंलोकाःक्लिश्यन्तिचान्यथा ॥ 10॥

अर्थ - वेद के पांडित्य को व्यर्थ प्रकाश करने वाला, शास्त्र और उसके आचार के विषय में व्यर्थ विवाद करनेवाला, शांँत पुरुषों को अन्यथा कहनेवाला, ये लोग व्यर्थ ही क्लेश उठाते हैं ॥ १० ॥

anyathā vēdapāṇḍityaṁśāstramācāramanyathā ॥ 
anyathā yadvadanśāṁtaṁlōkāḥkliśyanticānyathā ॥ 10॥
Meaning - Those who uselessly expose the wisdom of the Vedas, those who make pointless disputes about the scriptures and their conduct, those who say otherwise to peaceful people, these people suffer in vain.  ।।10 ॥
ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय – 5   श्लोक-  6-10

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

 चाणक्यनीतिदर्पण 5.1

चाणक्यनीतिदर्पण -चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ पंचमोऽध्यायः ॥ 5 ॥

atha paṁcamō’dhyāyaḥ ॥ 5 ॥

पतिरेवगुरुः स्त्रीणांसर्वस्याभ्यागतोगुरुः ॥ 
गुरुर निर्द्विजातीनां वर्णानां ब्राह्मणे गुरुः ॥ १ ॥

अर्थ - स्त्री का गुरु पति ही है, अभ्यागत सबका गुरु है, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, इनका गुरु अग्नि है और चारों वर्णों में गुरु ब्राह्मण है ॥ १०॥

patirēvaguruḥ strīṇāṁsarvasyābhyāgatōguruḥ ॥ 
gurura nirdvijātīnāṁ varṇānāṁ brāhmaṇē guruḥ ॥ 1 ॥

Meaning - Husband is the guru of a woman, guest is the guru of all, Brahmin, Kshatriya, Vaishya, their guru is Agni and in all four varnas the guru is Brahmin.  ।।10॥

यथाचतुर्भिःकन कंपरीक्ष्यतेनिघर्षणच्छेदनता पताडनैः । 
तथाचतुर्भिःपुरुषःपरीक्ष्यतेत्यागेन शीलेनगुणेनकर्मणा ॥ २ ॥

अर्थ - घिसना, काटना, तपाना, पीटना इन चार प्रकारों से जैसे सोने की परीक्षा की जाती है, वैसे ही दान, शील, गुण और आचार इन चारों प्रकार से पुरुष की भी परीक्षा की जाती है ॥ २ ॥

yathācaturbhiḥkana kaṁparīkṣyatēnigharṣaṇacchēdanatā patāḍanaiḥ | 
tathācaturbhiḥpuruṣaḥparīkṣyatētyāgēna śīlēnaguṇēnakarmaṇā ॥ 2 ॥
Meaning - Just as gold is tested in these four ways - rubbing, cutting, heating and beating, similarly a man is also tested in these four ways - charity, modesty, qualities and conduct.  ।।2॥

तावद्भयेषुभेतव्यंथावद्भयमनागतम् ॥ 
आगतंतुभयं दृष्ट्वा प्रहर्तव्यमशंकया ॥ ३ ॥

अर्थ - तब तक ही भयों से डरना चाहिये, जब तक भय नहीं आया अर्थात् भयानक परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई, और आये हुये भय को देखकर प्रहार करना उचित है अर्थात्  विकट परिस्थितियों के उत्पन्न हो जाने पर पूरी आक्रामकता और निर्भयता से उनका सामना करना चाहिए॥ ३ ॥

tāvadbhayēṣubhētavyaṁthāvadbhayamanāgatam ॥ 
āgataṁtubhayaṁ dr̥ṣṭvā prahartavyamaśaṁkayā ॥ 3 ॥
Meaning - One should be afraid of fears only until the fear has come, that is, a terrible situation has not arisen, and it is appropriate to attack after seeing the fear that has come, that is, when dire situations arise, one should face them with complete aggression and fearlessness. ।। 3॥

एकोदर समुद्भूताए कनक्षत्रजातकाः ॥ 
नभवंतिसमाःशीलैर्यथावदरिकंटकाः ॥ ४ ॥

अर्थ - एक ही गर्भ से उत्पन्न और एक ही नक्षत्र में जन्म लेने वाले भी शील से समान नहीं होते। जैसे बेर और उसके कांँटे ॥ ४ ॥

ēkōdara samudbhūtāē kanakṣatrajātakāḥ ॥ 
nabhavaṁtisamāḥśīlairyathāvadarikaṁṭakāḥ ॥ 4 ॥
Meaning: Even those born from the same womb and in the same constellation are not equal in morality.  Like the plum and its thorns. ।। 4॥

निःस्पृहोनाधिकारीस्यान्नाकामामंडनप्रियः॥ 
नाविदग्धःप्रियंब्रूयात्स्पष्टवक्तानवंचकः ॥५॥

अर्थ - जिसको किसी विषय की इच्छा न होगी, वह किसी विषय का अधिकार नहीं होगा अर्थात् उस पर कोई भी विषय अपना अधिकार स्थापित नहीं कर सकेगा, जो कामी नहीं होगा, वह शरीर की शोभा करनेवाली वस्तुओं में (अत्यधिक और बनावटी फैशन में) प्रीति नहीं रखेगा; जो चतुर नहीं होगा, वह प्रिय नहीं बोल सकेगा और स्पष्ट कहने वाला छली (कपटी) नहीं होगा ॥ ५ ॥

niḥspr̥hōnādhikārīsyānnākāmāmaṁḍanapriyaḥ॥ 
nāvidagdhaḥpriyaṁbrūyātspaṣṭavaktānavaṁcakaḥ ॥5॥

Meaning - One who does not desire any subject, will not have the right to any subject, that is, no subject will be able to establish his authority over him, one who is not lustful, will be fond of things that adorn the body (in an excessive and artificial fashion).  Will not keep;  One who is not clever will not be able to speak dearly and the one who speaks clearly will not be deceitful.  ।।5॥
ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय – 5   श्लोक-  1-5

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

 चाणक्यनीतिदर्पण 4.4

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ चतुर्थोऽध्यायः ॥ 4 ॥

atha caturthō’dhyāyaḥ ॥ 4 ॥

त्यजेत्धर्मंदयाहीनाविद्याहीनं गुरुंत्यजेत् ॥ 
त्यजेत्क्रोधमुखीं भार्यांनिस्नेहान्बांधवात्यजेत्।। १६।।

अर्थ -  दयारहित धर्म को छोड़ देना चाहिये, विद्या विहीन गुरु का त्याग उचित है, जिसके मुंँह से क्रोध प्रगट होता हो, ऐसी भार्या को अलग करना चाहिये और बिना प्रीति बांँधवों का त्याग विहित है ॥ १६ ॥

tyajēḍarmaṁdayāhīnāvadyāhīnaṁ guruṁtyajēt ॥ 
tyajētkrōdhamukhīṁ bhāryāṁnisnēhānbāṁdhavātyajētū 16

Meaning - Religion without mercy should be abandoned, it is appropriate to sacrifice a Guru without knowledge, whose mouth shows anger, such a wife should be separated and it is prescribed to sacrifice those without loving ties. 
।। 16 ॥
अध्वा जरा मनुष्याणां वाजिनांबन्धनं जरा ।
अमैथुनं जरा स्त्रीणां वस्त्राणाम् आतपो जरा ।।

अर्थ - मनुष्यों के लिए पैदल न चलना, घोड़ों को बाँधकर रखना, स्त्रियों के लिए असम्भोग (मैथुन न करना) और वस्त्रों के लिए धूप जरा (बुढापा) लाने का कारण होता है।

abhyājarāmanuṣyāṇāṁ vājināṁbandhanaṁjarā ॥ 
amathunaṁ jarāstrīṇāṁ vastrāṇāmātapōjarā ॥17॥

Meaning - For humans, not walking on foot, keeping horses tied, for women it causes asambhog (not having sex) and for clothes, sunlight causes aging.
।।17।।

कःकालःकानिमित्राणिकोदेशः कौव्ययागमौ 
कस्याहं का चमेशक्तिरितिचिंत्यंमुहुर्मुहुः॥१८॥

अर्थ - किस काल में क्या करना चाहिये, मित्र कौन है, देश कौन है, लाभ व्यय क्या है, किसका मैं हूंँ, मुझमें क्या शक्ति है इन सबका बार-बार विचार करना योग्य है ॥ १८ ॥

kaḥkālaḥkānimitrāṇikōdēśaḥ kauvyayāgamau 
kasyāhaṁ kā camēśaktiriticiṁtyaṁmuhurmuhuḥ॥18॥

Meaning - What should be done at what time, who is the friend, who is the country, what is the profit and expenditure, whose am I, what power do I have, it is worth thinking about all these again and again.  ।।18 ॥

अग्निर्देवोद्विजातीनां मुनीनांहृदिदैवतम् ॥ 
प्रतिमास्वल्पबुद्दीनां सर्वत्रसमदर्शिनां ॥ १९ ॥

अर्थ - ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, (द्विजों का) उनका देवता आग्नि है। मुनियों के हृदय में देवता रहता है। अल्पबुद्धियों के लिये मूर्ति में और समदर्शियों के लिये सभी स्थानों में देवता है ॥१९॥

agnirdēvōdvijātīnāṁ munīnāṁhr̥didaivatam ॥ 
pratimāsvalpabuddīnāṁ sarvatrasamadarśināṁ ॥ 19 ॥

Meaning - Brahmins, Kshatriyas, Vaishyas, (dwijas) their god is Agni.  God resides in the hearts of sages.  For the less intelligent, there are gods( The habitats of the heaven or swarga called devta) in idols and for the wise, there are gods( The habitats of the heaven or swarga called devta) everywhere. ।।१९।।
इति चतुर्थोऽध्यायः ॥ 4 ॥
iti caturthō’dhyāyaḥ ॥ 4 ॥
ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय – 4   श्लोक-  16-20

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

 चाणक्यनीतिदर्पण 4.3

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ चतुर्थोऽध्यायः ॥ 4 ॥

atha caturthō’dhyāyaḥ ॥ 4 ॥

ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय – 4   श्लोक-  11-15
सकृज्जल्पन्तिराजानः सकृज्जल्पंतिपंडिताः ॥ 
सकृत्कन्याःप्रदीयन्तेत्रीण्येतानिसकृत्सकृत् ।।४.११।।

अर्थ - राजा लोग एक ही बार आज्ञा देते हैं, पंडित लोग एक ही बार बोलते हैं, कन्या का दान एक ही बार होता है ये तीनों बात एक बार ही होती हैं ॥ ११ ॥

sakr̥jjalpantirājānaḥ sakr̥jjalpaṁtipaṁḍitāḥ ॥ 
sakr̥tkanyāḥpradīyantētrīṇyētānisakr̥tsakr̥t ॥4.11॥

Meaning - Kings give orders only once, scholars speak only once, marriage of a girl takes place only once, all three things happen only once.  ।।4.11 ॥

एकाकिनां तपोद्वाभ्यां पठनंगापनंत्रिभिः ॥ 
चतुर्भिगमनं क्षेत्रंपंचभिर्बहुभीरणम् ॥ १२ ॥

अर्थ - अकेले में तप, दो से पढना, तीन से गाना, चार से पन्थ में चलना, पांँच से खेती और बहुतों से युद्ध भलीभांति से बनते हैं ॥ १२ ॥

ēkākināṁ tapōdvābhyāṁ paṭhanaṁgāpanaṁtribhiḥ ॥ 
caturbhigamanaṁ kṣētraṁpaṁcabhirbahubhīraṇam ॥ 12 ॥

Meaning - Penance is done well with one, study with two, singing with three, following a sect with four, farming with five and war with many. ।। 12 ॥

साभार्यायाशुचिर्दक्षासाभार्यायापतिब्रता ॥ 
साभार्यापतिप्रीता साभार्यासत्यवादिनी ॥१३॥

अर्थ - वही भार्या है, जो पवित्र और चतुर हो, वही भार्या है; जो पतिव्रता है वही भार्या है; जिस पर पति की प्रीति है। वही भार्या है; जो सत्य बोलती है अर्थात् दान मान पोषण पालन के योग्य है ॥ १३ ॥

sābhāryāyāśucirdakṣāsābhāryāyāpatibratā ॥ 
sābhāryāpatiprītā sābhāryāsatyavādinī ॥13॥

Meaning - Only the one who is pure and clever is a wife; she is a wife;  The one who is devoted to her husband is a wife;  On whom her husband is in love.  She is the wife;  One who speaks the truth means one who is worthy of charity, respect and nurture. ।। 13 ॥

अपुत्रस्यगृहंशून्यदिशःशून्यास्त्ववाधवः ॥ 
मूर्खस्थहृदयंशून्यं सर्वशून्यादरिद्रता ॥ १४ ॥

अर्थ - निपुत्री(वांझ) का घर सूना है, बन्धुरहित दिशा शून्य है। मूर्ख का हृदय शून्य है। और सर्व शून्य दारिद्रता है ॥ १४ ॥

aputrasyagr̥haṁśūnyadiśaḥśūnyāstvavādhavaḥ ॥ 
mūrkhasthahr̥dayaṁśūnyaṁ sarvaśūnyādaridratā ॥ 14 ॥

Meaning - The house of a daughter-in-law is desolate, the direction without any brother is void.  The heart of a fool is void.  And there is zero poverty.  ।।14 ॥

अनभ्यासेविषशास्त्रमजीर्णे भोजनंविषम् ॥ 
दरिद्रस्यविषंगोष्ठीवृद्धस्यतरुणीविषम् ॥ १५ ॥

अर्थ - बिनाभ्यास से शास्त्र विष हो जाता है, बिना पचे भोजन विष हो जाता है, दरिद्र को गोष्ठी विष और वृद्ध को युवती विष जान पड़ती है ॥ १५ ॥

anabhyāsēviṣaśāstramajīrṇē bhōjanaṁviṣam ॥ 
daridrasyaviṣaṁgōṣṭhīvr̥ddhasyataruṇīviṣam ॥ 15 ॥

Meaning - Without practice, scriptures become poison, undigested food becomes poison, seminary becomes poison to a poor and a girl becomes poison to an old man. ।। 15 ।।

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।


 चाणक्यनीतिदर्पण 4.2

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ चतुर्थोऽध्यायः ॥ 4 ॥

atha caturthō’dhyāyaḥ ॥ 4 ॥

ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय – 4   श्लोक-  6-10
एकोऽपिगुणवान्पुत्रोनिर्गुणैश्वशतैर्वरः ॥ 
एक श्चंद्रस्तमोहंतिनचताराः सहस्रशः ॥ ६ ॥

अर्थ - एक भी गुणी पुत्र श्रेष्ठ है। सो सैकड़ों गुण- रहितों से क्या ? एक ही चन्द्र अन्धकार को नष्ट कर देता है, सहस्त्र तारे नहीं ॥ ६ ॥

ēkō’piguṇavānputrōnirguṇaiśvaśatairvaraḥ ॥ 
ēka ścaṁdrastamōhaṁtinacatārāḥ sahasraśaḥ ॥ 6 ॥

Meaning- Even a virtuous son is the best.  So what about hundreds of people without qualities?  Only one moon destroys darkness, not thousands of stars.  ।।6॥

मूर्खश्चिरायुर्जातो ऽपितस्माज्जातमृतोवरः ॥ 
मृतः सचाल्दुःखाययावज्जीवंजडोदहेत्॥७॥

अर्थ - मूर्ख जातक चिरंजीवी हो उससे उत्पन्न होते ही  जो मर गया  वह श्रेष्ठ है। इस कारण कि मरा थोड़े ही  दुःख का कारण होता है। जड़ जब तक जीता है तब तक  दुःख देता रहता है ॥ ७ ॥

mūrkhaścirāyurjātō ’pitasmājjātamr̥tōvaraḥ ॥ 
mr̥taḥ sacālduḥkhāyayāvajjīvaṁjaḍōdahēt॥7॥

Meaning - A foolish person may live long and the one who dies as soon as he is born is the best.  Because dying is a cause of little sorrow.  As long as the root lives, it continues to give pain.  7 ॥

कुग्रामवासः कुलहीनसेवाकुभोजनंक्रोधमुखी चभार्य्या ।। 
पुत्रश्वमूर्खाविधवाचकन्याविनाग्नि नाषट् प्रदर्हतिकायम् ॥ ८ ॥
अर्थ - कुग्राम में बास, नीच कुलकी सेवा, कुभोजन, कलही स्त्री, मूर्ख पुत्र, विधवा कन्या ये छः बिना आग ही शरीर को जलाते हैं ॥ ८ ॥

kugrāmavāsaḥ kulahīnasēvākubhōjanaṁkrōdhamukhī cabhāryyā ॥ 
putraśvamūrkhāvidhavācakanyāvināgni nāṣaṭ pradarhatikāyam ॥ 8 ॥

Meaning - Living in a bad village, serving a lowly family, bad food, a bad woman, a foolish son, a widowed daughter, these six burn the body without fire. ।। 8॥

किंतयाक्रियतेधे-वाणनदेोग्ध्रीनगुर्विणी ॥ 
कोऽर्थः पुत्रेणजातेन योनविद्वान्नभक्तिमान्। ९।

अर्थ - उस गाय से क्या लाभ है जो न दूध देवे, न गाभिन होवे, और ऐसे पुत्र हुए से क्या लाभ जो न विद्वान् भया न भक्तिमान् ॥ ६ ॥

kiṁtayākriyatēdhē-vāṇanadēōgdhrīnagurviṇī ॥ 
kō’rthaḥ putrēṇajātēna yōnavidvānnabhaktimān.।।9।।

Meaning: What is the benefit of a cow that does not give milk and is not pregnant, and what is the benefit of having a son who is neither learned nor fearful nor devout?  ।।9 ॥

संसारतापदग्धानात्रयोविश्रांतिहेतवः ॥ 
अपत्यंचकलत्रंचसतांसंगतिरेवच ॥ १० ॥

अर्थ - संसार के ताप से जलते हुए पुरुषों के विश्राम के हेतु तीन हैं, पुत्र, स्त्री और सज्जनों की संगति ॥५०॥
saṁsāratāpadagdhānātrayōviśrāṁtihētavaḥ ॥ 
apatyaṁcakalatraṁcasatāṁsaṁgatirēvaca ॥ 10 ॥

Meaning - There are three ways for men who are burning with the heat of the world to find solace: sons, women and the company of gentlemen. ।।10।।

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।


 चाणक्यनीतिदर्पण 4.1

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ चतुर्थोऽध्यायः ॥ 4 ॥

atha caturthō’dhyāyaḥ ॥ 4 ॥

आयुःकर्मचवित्तंचविद्यानिधनमेवच ॥ 
पंचैतानिहिसृज्यन्ते गर्भस्थस्यैवदेहिनः ॥१॥

अर्थ - यह निश्चय है कि, आयु, कर्म, धन, विद्या और मरण ये पाँचों जब जीव गर्भ मे ही रहता है तब ही निश्चित हो जाता है ॥ १ ॥

āyuḥkarmacavittaṁcavidyānidhanamēvaca ॥ 
paṁcaitānihisr̥jyantē garbhasthasyaivadēhinaḥ ॥1॥

Meaning - It is certain that age, work, wealth, knowledge and death become certain only when the living being remains in the womb. ।। 1॥

साधुभ्यस्तेनिवर्तन्तेपुत्रामित्राणिबांधवाः ॥ 
येचतैःसहगंतारस्तद्धर्मात्सुकृतंकुलम् ॥ २ ॥

अर्थ - पुत्र, मित्र, बन्धु ये साधु जनों से निवृत हो जाते हैं और जो उनका संग करते हैं उनके पुण्य से उनका कुल सुक्कृती हो जाता है ॥ २ ॥

sādhubhyastēnivartantēputrāmitrāṇibāṁdhavāḥ ॥ 
yēcataiḥsahagaṁtārastaddharmātsukr̥taṁkulam ॥ 2 ॥
Meaning - Sons, friends, brothers, these saints retire from the people and due to the good deeds of those who associate with them, their family becomes prosperous. ।। 2॥

दर्शनध्यान संस्पर्शेर्मत्सीकूर्मीचपक्षिणी ॥ 
शिशुपालयतेनित्यंतथा सज्जनसंगतिः ॥ ३ ॥

अर्थ - मछली कंछुई (कछवी)और पक्षी ये दर्शन ध्यान और स्पर्शसे जैसे बच्चों को सर्वदा पालतीं हैं वैसे ही सज्जनों की संगति है॥ ३ ॥

darśanadhyāna saṁsparśērmatsīkūrmīcapakṣiṇī ॥ 
śiśupālayatēnityaṁtathā sajjanasaṁgatiḥ ॥ 3 ॥

Meaning - These darshan of fish, turtle (Kachvi) and birds always nurture children with attention and touch, in the same way, they are the company of good people. ।। 3॥

यावत्स्वस्थोह्ययंदेहोयावन्मृत्यु श्वदूरतः ॥ 
तावदात्महितं कुर्यात्प्राणांतेकिं करिष्यति ॥४॥
अर्थ - जब तक देह निरोग है और तब लग मृत्यु दूर है तत्पर्यंत अपना हित पुण्यादि करना उचित्त है प्राण के अंत हो जाने पर कोई क्या करेगा ॥ ४ ॥

yāvatsvasthōhyayaṁdēhōyāvanmr̥tyu śvadūrataḥ ॥ 
tāvadātmahitaṁ kuryātprāṇāṁtēkiṁ kariṣyati ॥4॥
Meaning - As long as the body is healthy and death seems far away, till then it is appropriate to do good deeds etc. for one's own good. What will one do when one's life comes to an end? ।। 4॥

कामधेनुगुणा विद्याह्यकाले फलदायिनी ॥ 
प्रवासेमातृप्सदृशीविद्यागुप्तंधनं स्मृतम् ॥ ५ ॥

अर्थ - विद्या में कामधेनु के समान गुण हैं गुण हैं इस कारण कि अकाल में भी फल देती है विदेश में माता के समान है विद्या को गुप्त धन कहते हैं ॥ ५ ॥

kāmadhēnuguṇā vidyāhyakā lē phaladāyinī ॥ 
pravāsēmātr̥psadr̥śīvidyāguptaṁdhanaṁ smr̥tam ॥ 5 ॥
Meaning - Knowledge has the same qualities as Kamdhenu. It has the qualities because it gives fruits even in famine. It is like a mother in foreign countries. Knowledge is called hidden wealth. ।। 5॥
ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय – 4   श्लोक-  1-5

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

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