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 चाणक्यनीतिदर्पण 3.5

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ तृतीयोऽध्यायः ॥ 3 ॥

atha tr̥tīyō’dhyāyaḥ ॥ 3 ॥

मूर्खायत्रनपूज्यंतेधान्यंयत्रसुसंचितम् ।। 
दाम्पत्यकलहोनास्तितत्रश्रीः स्वयमागता ।।२१।।

अर्थ - जहाँ  मूर्ख नहीं पूजे जाते, जहाँ  अन्न संचित रहता है और जहाँ  स्त्री पुरुष में कलह नहीं होता वहाँ अपने आप ही लक्ष्मी विराजमान रहती या समृद्धि का निवास रहता है ॥ २१ ॥ 

mūrkhāpatranapūjyaṁtēdhānyaṁyatrasusaṁcitam ॥ 
dāmpatyakalahōnāstitatraśrīḥ svayamāgatā |21|

Meaning - Where fools are not worshipped, where food is stored and where there is no discord between men and women, there Goddess Lakshmi automatically resides or resides in prosperity.  21 ॥

॥ इति तृतीयोऽध्यायः ॥ ३ ॥ 
॥ iti tr̥tīyō’dhyāyaḥ ॥ 3 ॥ 
ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय –  3 श्लोक-  21-22

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

 चाणक्यनीतिदर्पण 3.4

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ तृतीयोऽध्यायः ॥ 3 ॥

atha tr̥tīyō’dhyāyaḥ ॥ 3 ॥

एकेनापि सुपुत्रेणविद्यायुक्तेन साधुना ॥ 
आल्हादितं कुलं सर्वंयथा चंद्रेणशर्वरी ॥१६॥
अर्थ - विद्यायुक्त भला एक भी सुपुत्र से सारा कुल ऐसे आनंदित हो जाता है जैसे चंद्रमा से रात्रि ॥१६॥
ēkēnāpi suputrēṇavidyāyuktēna sādhunā ॥ 
ālhāditaṁ kulaṁ sarvaṁyathā caṁdrēṇaśarvarī ॥16॥

Meaning - Even if one son is knowledgeable, the entire clan becomes as happy as the moon makes the night ॥16॥
 ekēnāpi

किंजातैर्बहुभिः पुत्रैः शोकसंतापकारकैः ॥ 
वरमेकः कुलालंबी यत्रविश्राम्यतेकुलम्॥१७॥

अर्थ - शोक संताप करने वाले उत्पन्न बहुपुत्रों से क्या ? कुल को सहारा देने वाला एक ही पुत्र श्रेष्ठ है जिसमें कुल विश्राम पाता है॥ १७ ॥

kiṁjātairbahubhiḥ putraiḥ śōkasaṁtāpakārakaiḥ ॥ 
varamēkaḥ kulālaṁbī yatraviśrāmyatēkulam॥17॥

Meaning: What about the many sons born to mourners?  Only one son who supports the family is the best and in whom the family finds rest.  17 ॥

लालयेत्पञ्चवर्षाणिदशवर्षाणिताड्येत् ॥ 
प्राप्तेतुषोड्शेवर्षेपुत्रेमित्रत्वमाचरेत् ॥ १८ ॥

अर्थ - पुत्र को पांच वर्ष तक दुलारें, उपरांत दश वर्ष पर्यंत ताड़न करें(अर्थात आवश्यकता पड़ने पर उसे कठोरता से भी शिक्षा दें), सोलहवें वर्ष की प्राप्ति होने पर पुत्र में मित्र समान आचरण करें ॥ १८ ॥

lālayētpañcavarṣāṇidaśavarṣāṇitāḍyēt ॥ 
prāptētuṣōḍśēvarṣēputrēmitratvamācarēt ॥ 18 ॥

Meaning - Cherish your son for five years, after that, chastise him for ten years (that is, teach him harshly if necessary), behave like a friend when the son attains the age of sixteen.  18 ॥


उपसर्गेऽन्यचक्रैचदुर्भिक्षेचभयावहे ॥ 
असाधुजनसंपर्केयःपलातिसजीवति ॥१९॥

अर्थ - उपद्रव उठने पर, शत्रु के आक्रमण करने पर, भयानक अकाल पडने पर और खल जन के संग होने पर जो भागता है वह जीवित रहता है ॥ १९ ॥

upasargē’nyacakraicadurbhikṣēcabhayāvahē ॥ 
asādhujanasaṁparkēyaḥpalātisajīvati ॥19॥

Meaning - The one who runs away when trouble arises, when the enemy attacks, when there is a terrible famine and when he is in the company of evil people, remains alive.  ।।19 ॥
धर्मार्थकाममोक्षेषुयस्यकोऽपिनविद्यते । 
जन्मजन्मनि मर्येषु मरणंतस्य केवलम् ॥२०॥

अर्थ - धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इनमें से जिसको कोई भी उपलब्ध या सिद्ध न हुआ हो उसको मनुष्यों में जन्म लेने का फल केवल मरण ही हुआ ॥ २० ॥

dharmārthakāmamōkṣēṣuyasyakō’pinavidyatē | 
janmajanmani maryēṣu maraṇaṁtasya kēvalam ॥20॥

Meaning - For the one who has not achieved or achieved any of these - Dharma, Artha, Kama and Moksha, the only result of being born among humans is death. ।। 20 ॥
ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय –  3 श्लोक-16-20  

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

 चाणक्यनीतिदर्पण 3.3

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ तृतीयोऽध्यायः ॥ 3 ॥

atha tr̥tīyō’dhyāyaḥ ॥ 3 ॥

उद्योगेनास्तिदारिद्र्यंजपतोनास्तिपातकम् ॥ 
मौनेनकलहोनास्तिनास्ति जागारतेभयम् । ११।
अर्थ - उपाय करनेपर दरिद्रता नहीं रहती, जपने वाले को पाप नहीं रहता, मौन होने से कलह नहीं होता और जागने वाले के निकट भय नहीं आता ॥११॥

udyōgēnāstidāridryaṁjapatōnāstipātakam ॥ 
maunēnakalahōnāstināsti jāgāratēbhayam | 11|
Meaning - There is no poverty by doing the right thing, the one who chants has no sins, there is no discord by being silent and no fear comes near the one who is alert.॥11॥

अतिरूपेणवैसीता आतगर्वेणरावणः ॥ 
अतिदानाद्वलिर्वद्धोयति सर्वत्रवर्जयेत्॥१२॥

अर्थ - अति सुंदरता के कारण सीता हरी गई, अति गर्व से रावण मारा गया, बहुत दान देकर बलि को बंधना पडा; इस हेतु अति को सब स्थल में छोड देना चाहिये ॥ १२ ॥

atirūpēṇavaisītā ātagarvēṇarāvaṇaḥ ॥ 
atidānādvalirvaddhōyati sarvatravarjayēt॥12॥
Meaning - There is no poverty by doing the right thing, the one who chants has no sins, there is no discord by being silent and no fear comes near the one who is alert.॥11॥

कोहिभारःसमर्थानांकिंदुरं व्यवसायिनाम् ॥ 
कोविदेशः सुविद्यानांकः प्रियःप्रियवादिनाम्॥ 13 ॥

अर्थ - समर्थ को कौन वस्तु भारी है, काम में तत्पर रहने वाले को क्या दूर है सुन्दर विद्यावालों को कौन विदेश है, प्रियवादियों को अप्रिय कौन है ।

kōhibhāraḥsamarthānāṁkiṁduraṁ vyavasāyinām ॥ 
kōvidēśaḥ suvidyānāṁkaḥ priyaḥpriyavādinām॥ 13 ॥
Meaning - What is heavy for the capable, what is too far for the one who is ready to work, what is foreign to the learned, what is unpleasant to the dear litigants.


एकेनापिसुवृक्षेणपुष्पितेन सुगन्धिना ॥ 
वासितंतद्वनंसर्वं सुपुत्रेणकुलंयथा ॥ १४ ॥

अर्थ - एक भी अच्छे वृक्ष से जिसमें सुन्दर फूल और गन्ध है ऐसे सब वन सुवासित हो जाता है, जैसे सुपुत्र से कुल ॥ १४ ॥

ēkēnāpisuvr̥kṣēṇapuṣpitēna sugandhinā ॥ 
vāsitaṁtadvanaṁsarvaṁ suputrēṇakulaṁyathā ॥ 14 ॥
Meaning - Even a single good tree, which has beautiful flowers and fragrance, makes the whole forest fragrant, just as a clan becomes blessed with a son.  14 ॥

एकेन शुष्कवृक्षेण दह्यमानेन वह्निना। दह्यते तद्वनं सर्वं कुपुत्रेण कुलं यथा ॥ 15।।

अर्थ - आग से जलते हुये एक ही सूखे वृक्ष से वह सब वन ऐसे जल जाता है जैसे कुपुत्र से कुल ॥१५॥

ēkēna śuṣkavr̥kṣēṇa dahyamānēna vahninā| dahyatē tadvanaṁ sarvaṁ kuputrēṇa kulaṁ yathā ॥ 

Meaning - A single dry tree burning with fire burns the entire forest like an entire forest is burnt by an evil son.
ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय – 3 श्लोक- 11-15

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

 चाणक्यनीतिदर्पण 3.2

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ तृतीयोऽध्यायः ॥ 3 ॥

atha tr̥tīyō’dhyāyaḥ ॥ 3 ॥

ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   अध्याय -3 श्लोक- 6-10
प्रलयेभिन्नमर्यादाभवन्तिकिलसागराः ॥ 
सागराभेदमिच्छान्तिप्रलये ऽपिनसाधवः ।॥६॥

अर्थ - समुद्र प्रलय के समय अपनी मर्यादा को छोड़ देते हैं और सागर भेद की इच्छा भी रखते हैं परन्तु साधु (सज्जन) लोग प्रलय होने पर भी अपनी मर्यादा को नहीं छोड़ते (अर्थात वे समुद्र से भी श्रेष्ठ हैं॥ ६ ॥

pralayēbhinnamaryādābhavantikilasāgarāḥ ॥ 
sāgarābhēdamicchāntipralayē ’pinasādhavaḥ ॥|6॥

Meaning - At the time of flood, the oceans give up their dignity and also wish to separate from the ocean, but sages (gentlemen) do not give up their dignity even when there is a flood (that is, they are better than the sea. ॥ 6 ॥

मूर्खस्तुपरिहर्तक्सःप्रत्यक्षोद्विपदःपशुः ॥ 
भिद्यत्तेवाक्यशल्येन अदृशंकंटकंयथा ॥ ७॥

अर्थ - मूर्ख को दूर करना उचित है, इस कारण कि, देखने में वह मनुष्य है; परन्तु यथार्थ में देखें तो दो पांव वाला पशु है। और वाक्यरूप कांटे को बेधता है जैसे अन्धे को कांटा ॥ ७ ॥
mūrkhastuparihartaksaḥpratyakṣōdvipadaḥpaśuḥ ॥ 
bhidyattēvākyaśalyēna adr̥śaṁkaṁṭakaṁyathā ॥ 7॥
Meaning - It is appropriate to remove a fool because, in appearance, he is a human being; But in reality it is a two-legged animal. And the sentence form pierces a thorn like a thorn pierces a blind man. 7 ॥

रूपयौवनसम्पन्नाविशालकुलसम्भवाः ॥ 
विद्याहीनानशोभन्तेनिर्गंधाइवकिंशुकाः॥८॥

अर्थ - सुंदरता, तरुणता और बडे कुल में जन्म इनके रहते भी विद्याहीन पुरुष बिना गन्ध पलाश (ढाक) के फूल के समान नहीं शोभते ॥ ८ ॥

rūpayauvanasampannāviśālakulasambhavāḥ ॥ 
vidyāhīnānaśōbhantēnirgaṁdhāivakiṁśukāḥ॥8॥
Meaning - Despite beauty, youth and birth in a big family, a man without education does not look as good as a flower without fragrance. 8॥

कोकिलानांस्वरोरूपंस्त्रीणांरूपंपतिव्रतम् ॥
विद्यारूपंकुरूपाणांक्षमारूपंतपस्विनाम् ॥९॥

अर्थ - कोकिलों की शोभा स्वर है, स्त्रियोंकी शोभा पातिव्रत है, कुरूपों की शोभा विद्या है, तपस्वियों की शोभा क्षमा है ॥ ९ ॥

kōkilānāṁsvarōrūpaṁstrīṇāṁrūpaṁpativratam ॥
vidyārūpaṁkurūpāṇāṁkṣamārūpaṁtapasvinām ॥9॥

Meaning - The beauty of nightingales is voice, the beauty of women is devotion, the beauty of ugly people is knowledge, the beauty of ascetics is forgiveness. 9॥


त्यजेदेकं कुलस्यार्थेग्रामस्यार्थेकुलंत्यजेत् ॥ 
ग्रामजनपदस्यार्थेआत्मार्थेपृथिवींत्यजेत्॥१०॥

अर्थ - कुल के निमित्त एक को छोड़ देना चाहिये, ग्राम के हेतु कुल का त्याग उचित है, देश-के अर्थ ग्राम का और अपने अर्थ पृथिवी का अर्थात् सबका त्याग ही उचित है ॥ १० ॥

tyajēdēkaṁ kulasyārthēgrāmasyārthēkulaṁtyajēt ॥ 
grāmajanapadasyārthēātmārthēpr̥thivīṁtyajēt॥10॥

Meaning - One should be sacrificed for the sake of the clan, it is appropriate to sacrifice the clan for the sake of the village, it is appropriate to sacrifice the country (meaning the village) and one's own meaning the earth i.e. sacrificing everything.  10 ॥

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

 चाणक्यनीतिदर्पण

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथ तृतीयोऽध्यायः ॥ 3 ॥

atha tr̥tīyō’dhyāyaḥ ॥ 3 ॥

कस्यदोषः कुलेनास्तिव्याधिनाकेनपीडिताः॥ 
व्यसनंकेनन प्राप्तं कस्य सौख्यंनिरन्तरम् ॥१॥

अर्थ - किस के कुल में दोष नहीं है, व्याधि ने किसे पीडित नहीं किया, किसको दुःख नहीं मिला, किसको सदा सुख ही प्राप्त हुआ है (अर्थात् कोई भी न तो सदा सुखी रहा है और न ही किसी का भी कुल निर्दोष है।)॥ 1 ॥ 

kasyadōṣaḥ kulēnāstivyādhinākēnapīḍitāḥ॥ 
vyasanaṁkēnana prāptaṁ kasya saukhyaṁnirantaram ॥1॥


आचार: कुलमाख्यातिदेशमाख्यातिभाषणम्॥ 
संभ्रमःस्नेहमाख्यातिवपुराख्यातिभोजनम्॥२॥

अर्थ - आचार कुल को बतलाता है, बोली देश को जताती है, आदर प्रीति का प्रकाश करता है, शरीर भोजन को जताता है ॥ २ ॥

ācāra: kulamākhyātidēśamākhyātibhāṣaṇam॥ 
saṁbhramaḥsnēhamākhyātivapurākhyātibhōjanam॥2॥

Meaning - Conduct reflects the clan, speech reflects the country, respect reflects love, body reflects food. ॥ 2॥

सुकुलेयोजयेत्कन्यापुत्रं विद्या सुयोजयेत् ॥ 
व्यसनेयोजयेच्छत्रु मिष्टंधर्मेण योजयेत् ॥ ३ ॥

अर्थ - कन्या को श्रेष्ठ कुल वाले को देना चाहिये, पुत्र को विद्या में लगाना चाहिये। शत्रु को दुःख पहुँचाना उचित है, और मित्र को धर्म का उपदेश करना चाहिये ॥ ३ ॥

sukulēyōjayētkanyāputraṁ vidyā suyōjayēt ॥ 
vyasanēyōjayēcchatru miṣṭaṁdharmēṇa yōjayēt ॥ 3 ॥
Meaning - The daughter should be given to someone from a good family, the son should be engaged in education, it is appropriate to hurt the enemy and one should preach religion to the friend. 3॥

दुर्जनस्यचसर्पस्यवरं सर्पोनदुर्जनः ॥ 
सर्वोदंशतिकालेतुदुर्जनस्तुपदेपदे ॥ ४ ॥

अर्थ - दुर्जन और सर्प में से सर्प अच्छा है दुर्जन नहीं। क्योंकि सर्प काल आने पर ही काटता है दुर्जन तो पग पग पर कष्ट देता है॥ ४ ॥

durjanasyacasarpasyavaraṁ sarpōnadurjanaḥ ॥ 
sarvōdaṁśatikālētudurjanastupadēpadē ॥ 4 ॥

Meaning - Between the wicked and the snake, the snake is better, not the wicked, because the snake bites when the time comes and the wicked hurts at every step. ॥ 4 ॥

एतदर्थंकुलीनानांनृपाः कुर्वतिसंग्रहम् ॥ 
आदिमध्यावसानेषुनत्यजन्तिचतेनृपम् ॥५॥

अर्थ - राजा लोग कुलीनों का संग्रह इस निमित्त करते हैं कि, वे आदि अर्थात् उन्नति, मध्य अर्थात् साधारण और अंत अर्थात् विपत्ति में राजाको नहीं छोड़ते ॥ ५ ॥

ētadarthaṁkulīnānāṁnr̥pāḥ kurvatisaṁgraham ॥ 
ādimadhyāvasānēṣunatyajanticatēnr̥pam ॥5॥

Meaning - Kings collect noble people so that they do not leave the king in the beginning i.e. progress, middle i.e. ordinary and at the end i.e. calamity. 5॥
ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   द्वितीय अध्याय – श्लोक- 

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

 चाणक्यनीतिदर्पण

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथद्वितीयोऽध्यायः ॥ 2 ॥

athadvitīyō’dhyāyaḥ ॥ 2 ॥


बलंविद्याचविप्राणांराज्ञांसैन्यंबलंतथा ॥ 
बलंवित्तंचवैश्यानांशूद्राणांचकनिष्ठिका॥१६॥

अर्थ - ब्राह्मणों का बल विद्या है, वैसे ही राजा का बल सेना, वैश्यों का बल धन और शूद्रों का बल सेवा ॥ १६ ॥

balaṁvidyācaviprāṇāṁrājñāṁsainyaṁbalaṁtathā ॥ 
balaṁvittaṁcavaiśyānāṁśūdrāṇāṁcakaniṣṭhikā॥16॥
Meaning - The strength of Brahmins is knowledge, similarly the strength of a king is army, the strength of Vaishyas is wealth and the strength of Shudras is service. ॥ 16 ॥

निर्धनंपुरुषेवेश्याप्रजाभग्नंनृपंत्यजेत् ॥ 
खगावीत फलंवृक्षंभुक्ताचअभ्यागता गृहम् ।१७।

अर्थ - वेश्या निर्धन पुरुष को, प्रजा शक्तिहीन राजा को, पक्षी फल रहित वृक्ष को, और अभ्यागत भोजन करके घर को छोड़ देते हैं ॥ १७ ॥

nirdhanaṁpuruṣēvēśyāprajābhagnaṁnr̥paṁtyajēt ॥ 
khagāvīta phalaṁvr̥kṣaṁbhuktācaabhyāgatā gr̥ham |17|

Meaning - A prostitute leaves a poor man, subjects leave a powerless king, birds leave a fruitless tree, and guests leave their homes after eating food. ॥ 17॥

गृहत्वादक्षिणांविप्रास्त्यजान्तियजमानकं ॥ 
प्राप्तविद्या गुरुशिष्यादग्धारण्यं मृगास्तथा ॥१८॥

अर्थ - ब्राह्मण दक्षिणा लेकर यजमान को त्याग देते हैं, शिष्य विद्या प्राप्त हो जाने पर गुरु को, वैसे ही जले हुये वन को मृग छोड़ देते हैं ॥ १८ ॥

gr̥hatvādakṣiṇāṁviprāstyajāntiyajamānakaṁ ॥ 
prāptavidyā guruśiṣyādagdhāraṇyaṁ mr̥gāstathā ॥18॥

Meaning - Brahmins leave their host after taking Dakshina, disciples leave their Guru after attaining knowledge, similarly deer leave a burnt forest. 18 ॥

दुराचारीदुरादृष्टिदुरावासीचदुर्जनः ॥ 
यन्मैत्रीक्रियतेपुंसासतुशीघ्रंविनश्यति॥ १९ ॥

अर्थ - जिसका आचरण बुरा है, जिसकी दृष्टि पाप में रहती है, बुरे स्थानों में रहने वाला और दुर्जन इन पुरुषोंकी मैत्री जिसके साथ की जाती है वह नर शीघ्र ही नष्ट हो जाता है ॥ १९ ॥

durācārīdurādr̥ṣṭidurāvāsīcadurjanaḥ ॥ 
yanmaitrīkriyatēpuṁsāsatuśīghraṁvinaśyati॥ 19 ॥
Meaning - The person whose conduct is bad, whose vision is in sin, who lives in bad places and who makes friends with these evil people, soon gets destroyed. ॥ 19 ॥

समानेशोभतेप्रीतीराज्ञिसेवाचशोभते ॥ 
वाणिज्यंव्यवहारेषुस्त्रीदिव्याशोभते गृहे॥२०॥

अर्थ - समान जन में प्रीति शोभती है, और सेवा राजा की शोभती है, व्यवहार में वाणिज्य, और दिव्य सुंदर स्त्री घर में शोभती है ॥ २० ॥

samānēśōbhatēprītīrājñisēvācaśōbhatē ॥ 
vāṇijyaṁvyavahārēṣustrīdivyāśōbhatē gr̥hē॥20॥

Meaning - Love is befitting an equal, service is befitting a king, commerce is befitting behavior, and a divinely beautiful woman is befitting a home. 20 ॥
इति द्वितीयोऽध्यायः ॥ २ ॥
iti dvitīyō’dhyāyaḥ ॥ 2 ॥

ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   द्वितीय अध्याय – श्लोक- 16-20

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

 चाणक्यनीतिदर्पण

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथद्वितीयोऽध्यायः ॥ 2 ॥

athadvitīyō’dhyāyaḥ ॥ 2 ॥

मातारिपुः पिताशत्रुबीलोयाभ्यांनपाठ्यते ॥ 
सभामध्येनशो अंतर्हसमध्येबकोयथा ॥ ११॥

अर्थ - वह माता शत्रु और पिता बैरी है जिसने अपने बालक को शिक्षा न दी हो, क्योंकि वे सभा के बीच  ऐसे शोभते हैं, जैसे हंसों के बीच बगुला ॥ ११ ॥

mātāripuḥ pitāśatrubīlōyābhyāṁnapāṭhyatē ॥ 
sabhāmadhyēnaśō aṁtarhasamadhyēbakōyathā ॥ 11॥
Meaning - He is the enemy of the mother and the enemy of the father who has not taught his child, because he is as graceful among the gathering as a heron among the swans. ॥ 11 ॥

लालनाद्बहवोदोषास्ताडनाद्वद्दवेोगुणाः ॥ 
तस्मात्पुत्रंचशिष्यं चताडयेन्नतुलालयेत्॥१२॥

अर्थ - दुलारने से (आवश्यकता से अधिक) बहुत दोष होते हैं और दंड देने से बहुत गुण इस हेतु पुत्र और शिष्य को दण्ड देना उचित है,केवल लालना नहीं ॥ १२ ॥

lālanādbahavōdōṣāstāḍanādvaddavēōguṇāḥ ॥ 
tasmātputraṁcaśiṣyaṁ catāḍayēnnatulālayēt॥12॥

Meaning - There are many vices in loving and many virtues in punishment, therefore it is appropriate to punish a son and a disciple, not only  to love them. 12 ॥

श्लोकेन वा तदर्धेन तदर्धार्धाक्षरेण वा ।
अबन्ध्यं दिवसं कुर्याद्दानाध्ययनकर्मभिः ॥ ०२-१३

अर्थ - श्लोक या श्लोक के आधे भाग को अथवा आधे में से आधे को प्रतिदिन पढना उचित है। क्योंकि दान, अध्ययन आदि कर्मों से दिन को सार्थक करना चाहिये ॥ १३ ॥

ślōkēna vā tadardhēna tadardhārdhākṣarēṇa vā |
abandhyaṁ divasaṁ kuryāddānādhyayanakarmabhiḥ ॥ 02-13 ॥
Meaning - It is appropriate to read a verse or half of a verse or half of the verses every day. Because the day should be made meaningful by activities like charity, study etc. 13 ॥

कान्तावियोगः स्वजनापमानं
ऋणस्य शेषं कुनृपस्य सेवा ।
दारिद्र्यभावाद्विमुखं च मित्रं
विनाग्निना पञ्च दहन्ति कायम् ॥कायम् ०२-१४

अर्थ - स्त्री का बिरह, अपने जनो सें अनादर, युद्ध करके बचा शत्रु, कुत्सित राजा की सेवा, दरिद्रता और अविवेकियों की सभा ये बिना आग ही शरीर को जलाते हैं १४ ॥

kāntāviyōgaḥ svajanāpamānaṁ
r̥ṇasya śēṣaṁ kunr̥pasya sēvā |
dāridryabhāvādvimukhaṁ ca mitraṁ
vināgninā pañca dahanti kāyam ॥kāyam 02-14
Meaning - Separation from wife, disrespect from one's own people, enemy saved from war, service to an evil king, poverty and gathering of unreasonable people, these burn the body without fire. 14 ॥


नदीतीरेचयेवृक्षाःपरगेहेषुकामिनि ॥ 
मंत्रिहीनाश्चराजानःशीघ्रनश्यंत्यसंशयम्॥१५॥

अर्थ - नदी के तीर के वृक्ष, दूसरे के घर में (अनुचित रीति से) जाने वाली स्त्री, मंत्री रहित राजा, निश्चय ही ये शीघ्र ही नष्ट हो जाते हैं ॥ १५ ॥

nadītīrēcayēvr̥kṣāḥparagēhēṣukāmini ॥ 
maṁtrihīnāścarājānaḥśīghranaśyaṁtyasaṁśayam॥15॥
Meaning - Trees on the banks of the river, a woman going to someone else's house (improperly), a king without a minister, surely these are soon destroyed. ॥ १५ ॥
ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   द्वितीय अध्याय – श्लोक- 11-15

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

 चाणक्यनीतिदर्पण

चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों  के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं  रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।

अथद्वितीयोऽध्यायः ॥ 2 ॥

athadvitīyō’dhyāyaḥ ॥ 2 ॥


नविश्वसेत्कु मित्रेच मित्रेचापिनविश्वसेत् ॥ 
कदाचित्कुपितोमित्रोसर्वंगुह्यंप्रकाशयेत् ॥६॥

अर्थ - कुमित्र पर विश्वास तो किसी प्रकार से नहीं करना चाहिये। और सुमित्र पर भी विश्वास न रखें। इसका कारण यह है कि, कदाचित् मित्र रुष्ट हो जाय तो सब गुप्त बातों को प्रसिद्ध या प्रकट कर दे और हम संकट में आ जायें यह संभव है॥ ६ ॥

naviśvasētku mitrēca mitrēcāpinaviśvasēt ॥ 
kadācitkupitōmitrōsarvaṁguhyaṁprakāśayēt ॥6॥

Meaning - Kumitra (bad friends) should not be trusted in any way. And don't trust Sumitra (Good Friends) either. The reason for this is that if a friend gets angry then he may make all the secret things public or reveal them and it is possible that we may get into trouble. ।।6॥

मनसाचिंतितं कार्यंवा चानैवप्रकाशयेत् ॥ 
मंत्रेणरक्षयेद्रूढं कार्यंचा पिनियोजयेत् ॥ ७ ॥

अर्थ - मन से सोचे हुये कार्य का प्रकाश वचन से न करें, किंतु मंत्र (गोपनीयता) से उसकी रक्षा करें। और गुप्त ही उस कार्य को संपन्न करें॥ ७ ॥

manasāciṁtitaṁ kāryaṁvā cānaivaprakāśayēt ॥ 
maṁtrēṇarakṣayēdrūḍhaṁ kāryaṁcā piniyōjayēt ॥ 7 ॥
Meaning - Do not reveal the work thought in your mind through words, but protect it with mantra (secrecy). And complete that work secretly. ॥ 7 ॥


कष्टंचखलुमूर्खत्वंकष्टंचखलुयौवनम् ॥ 
कष्टात्कष्टतरं चैवपरगेहनिवासनम् ॥ ८ ॥

अर्थ - मूर्खता दुःख देती है, और युवापन भी दुःख देता है, परंतु दूसरे के गृह का वास तो बहुत ही दुःख दायक होता है ॥ ८ ॥

kaṣṭaṁcakhalumūrkhatvaṁkaṣṭaṁcakhaluyauvanam ॥ 
kaṣṭātkaṣṭataraṁ caivaparagēhanivāsanam ॥ 8 ॥

Meaning - Stupidity gives sorrow, and youth also gives sorrow, but living in someone else's house is very painful. ॥8॥


शैलेशैलेनमाणिक्य मौक्तिकंनगजेगजे ॥ 
साधवोन हिसर्वत्र चंदनंनवनेवने ॥ ९ ॥

अर्थ - सब पर्वतों पर माणिक्य नहीं होता और मोती सब हाथियों में नहीं मिलता, साधु लोग सभी स्थानों पर नहीं मिलते और सभी वनों में चंदन नहीं होता ॥ 9 ॥

śailēśailēnamāṇikya mauktikaṁnagajēgajē ॥ 
sādhavōna hisarvatra caṁdanaṁnavanēvanē ॥ 9 ॥ 

Meaning - Ruby is not found on all mountains, pearls are not found in all elephants, sages are not found in all places and sandalwood is not found in all forests. ॥ 9॥


पुत्राश्वविविधैःशीलैर्नियोज्याः सततंबुधैः ॥ 
नीतिज्ञाःशीलसंपन्नाभवंतिकुलपूजिताः॥१०॥

अर्थ - बुद्धिमानों को अपने पुत्रों को नाना भांति भांति की सुशीलता में लगाना चाहिए; इस कारण कि, नीति के जानने वाले यदि शीलवान् हों, तो कुल में पूजित होते हैं।॥१०॥

putrāśvavividhaiḥśīlairniyōjyāḥ satataṁbudhaiḥ ॥ 
nītijñāḥśīlasaṁpannābhavaṁtikulapūjitāḥ॥10॥
Meaning - The wise should engage their sons in various kinds of good deeds; Because, if those who know the policy are polite, then they are worshiped in the family.॥10॥

ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   द्वितीय अध्याय – श्लोक- 6-10

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

About Chanakya(चाणक्य के बारे में)

चाणक्य, जिन्हें कौटिल्य या विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है, एक प्राचीन भारतीय दार्शनिक, गुरु और आचार्य, अर्थशास्त्री, न्यायविद् और राजकीय सलाहकार थे।  वह चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में रहते थे और राजनीतिक विचार और शासन में उनके महत्वपूर्ण योगदान के कारण उन्हें भारतीय इतिहास की सबसे महान हस्तियों में से एक माना जाता है।

 चाणक्य को उनके मौलिक कार्य, अर्थशास्त्र, जो कि शासन कला, अर्थशास्त्र और सैन्य रणनीति पर एक ग्रंथ है, के लिए जाना जाता है।  अर्थशास्त्र शासन, कराधान, कूटनीति, जासूसी और युद्ध पर विस्तृत निर्देश प्रदान करता है, जिससे यह शासकों के लिए एक सफल राज्य की स्थापना और रखरखाव के लिए एक व्यापक मार्गदर्शिका बन जाता है।

 चाणक्य के सबसे प्रसिद्ध शिष्य मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य थे।  उन्होंने नंद वंश के पतन की योजना बनाकर और चंद्रगुप्त को मौर्य साम्राज्य के शासक के रूप में स्थापित करके चंद्रगुप्त के सत्ता में आने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 अपनी राजनीतिक कौशल के अलावा, चाणक्य नैतिक और नैतिक मूल्यों के भी समर्थक थे।  उन्होंने व्यक्तिगत और राजनीतिक जीवन दोनों में  सत्यनिष्ठा और धार्मिकता के महत्व पर जोर दिया।  शासन पर उनकी शिक्षाएँ केवल सत्ता प्राप्त करने और बनाए रखने के बारे में नहीं थीं, बल्कि लोगों के कल्याण और समृद्धि के लिए इसका उपयोग करने के बारे में भी थीं।

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

 चाणक्यनीतिदर्पण

अथद्वितीयोऽध्यायः ॥ 2 ॥

athadvitīyō’dhyāyaḥ ॥ 2 ॥

अनृतं साहसं माया मूर्खत्वमतिलोभिता ।
अशौचत्वं निर्दयत्वं स्त्रीणां दोषाः स्वभावजाः ॥ ०२-०१

अर्थ - असत्य, बिना बिचार किसी काम में झटपट लग जाना, छल, मूर्खता, लोभ, अपवित्रता और निर्दयता ये स्त्रियों के स्वाभाविक दोष हैं ॥ १ ॥

anṛtaṃ sāhasaṃ māyā mūrkhatvamatilobhitā |
aśaucatvaṃ nirdayatvaṃ strīṇāṃ doṣāḥ svabhāvajāḥ ॥ 02-01
Meaning - Falsehood, getting involved in any work quickly without thinking, deceit, stupidity, greed, impurity and cruelty are the natural faults of women. ॥1॥


भोज्यंभोजनशक्तिश्वरतिशक्तिर्वरङ्गना ।। 
विभत्रोदानशक्तिश्वनाल्पस्थतपसः फलम् ।२।

अर्थ - भोजन के योग्य पदार्थ और भोजन की शक्ति, सुन्दर स्त्री, और रति की शक्ति, ऐश्वर्य और दानशक्ति इनका होना थोड़े तप का फल नहीं है ॥ २ ॥

bhōjyaṁbhōjanaśaktiśvaratiśaktirvaraṅganā ॥ 
vibhatrōdānaśaktiśvanālpasthatapasaḥ phalam |2|

Meaning - Having food items and the power of food, beautiful women and the power of love, opulence and the power of charity is not the result of a little penance. ॥ 2॥

यस्यपुत्रोर्वशीभूतो भार्याच अनुगामिनी ॥ 
विभवेयश्व संतुष्टस्तस्यस्वर्गइहैवहि ॥ ३ ॥

अर्थ - जिसका पुत्र वश में रहता है और स्त्री इच्छा के अनुसार चलती है और जो विभव में संतोष रखता है उसको स्वर्ग यहांही है ॥ ३ ॥

yasyaputrōrvaśībhūtō bhāryāca anugāminī ॥ 
vibhavēyaśva saṁtuṣṭastasyasvargihaivahi ॥ 3 ॥
Meaning - One whose son remains under control and his wife follows his wishes and who is content with wealth, heaven is here only. ॥ 3 ॥

तेपुत्रायेपितुर्भक्ताः स पितायस्तुपोषकः ॥ 
तन्मित्रंयत्रविश्वासःसाभार्यायत्रनिर्वृतिः॥४॥

अर्थ - वही पुत्र है, जो पिता का भक्त है वही पिता है, जो पालन करता है, वही मित्र है, जिस पर विश्वास है, वही स्त्री है, जिससे सुख प्राप्त होता है ॥४।

tēputrāyēpiturbhaktāḥ sa pitāyastupōṣakaḥ ॥ 
tanmitraṁyatraviśvāsaḥsābhāryāyatranirvr̥tiḥ॥4॥

Meaning - He is the son, the one who is a devotee of his father, he is the father, the one who nurtures, he is the friend, on whom one trusts, he is the woman, from whom one gets happiness. ॥4॥

परोक्ष कार्यहंतारं प्रत्यक्षेप्रियवादिनम् ॥ 
वर्जयेत्तादृशंमित्रविषकुंभंपयोमुखम् ॥ ५ ॥

अर्थ - हमारे समक्ष न रहने पर हमारे कार्य को बिगाड़ने वाले और हमारी आंँखों के सामने मीठा-मीठा बोलने वाले इस प्रकार के मित्रों को विष से भरे हुए कुंभ में ऊपर ऊपर दूध भरा हो, ऐसा जानकर त्याग देना चाहिए ॥ ५ ॥

parōkṣa kāryahaṁtāraṁ pratyakṣēpriyavādinam ॥ 
varjayēttādr̥śaṁmitraviṣakuṁbhaṁpayōmukham ॥ 5 ॥
Meaning - Such friends, who spoil our work when they are not present in front of us, and who speak sweetly in front of our eyes, should be discarded considering them to be like an Aquarius full of milk filled to the brim with poison. 5॥
ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण,  रचनाकार – आचार्य चाणक्य,   द्वितीय अध्याय – श्लोक- 1-5

चाणक्य की प्रसिद्धि : 

ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति,  चाणक्य नीति की 10 बातें,  चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें,  चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है । 

चाणक्य का कालातीत प्रभाव  :

हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन‌ के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।

About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :

 चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है।  राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

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