चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।
अथ सप्तमोऽध्यायः ॥ 7 ॥
atha saptamō’dhyāyaḥ ॥ 7 ॥
ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण, रचनाकार – आचार्य चाणक्य, अध्याय – 7 श्लोक- 16-21
स्वर्गस्थितानामिहजीवलोके चत्वारिचिह्नानिव- संतिदेये ॥ दानप्रसंगोमधुराचवाणीदेवार्चनंब्रा-ह्मणतर्पणंचः ॥ १६ ॥ अर्थ - संसार में आनेपर स्वर्गवासियों के शरीर में चार चिन्ह रहते हैं। दानका स्वभाव, मीठा बचन, देवता की पूजा और ब्राह्मण को तृप्त करना अर्थात् जिन लोगों में दान आदि लक्षण रहें उनको जानना चाहिये कि वे अपने पुण्य के प्रभाव से स्वर्गवासी मर्त्यलोक में अवतार लिये हैं ॥ १६ ॥ svargasthitānāmihajīvalōkē catvāricihnāniva- saṁtidēyē ॥ dānaprasaṁgōmadhurācavāṇīdēvārcanaṁbrā-hmaṇatarpaṇaṁcaḥ ॥ 16 ॥ Meaning - When the heavenly beings come into this world, there are four signs in their bodies. The nature of charity, sweet words, worship of God and satisfying Brahmins, that is, those who have the characteristics of charity etc., should know that due to the influence of their good deeds, they have incarnated in the heavenly world in the mortal world. 16 ॥ अत्यन्तकोपःकटुकाचवाणी दरिद्रताचस्वजने- घुवैरं ॥ नीचप्रसंगः कुलद्दीन सेवाचिह्नानिदेहेन- रकस्थितानाम् ॥ १७ ॥ अर्थ - अत्यंत क्रोध, कटु बचन, दरिद्रता, अपने जनों में बैर, नीच का संग कुलहीन की सेवा ये चिन्ह नरकवासियों के देहो में रहते हैं ॥ १७ ॥ atyantakōpaḥkaṭukācavāṇī daridratācasvajanē- ghuvairaṁ ॥ nīcaprasaṁgaḥ kuladdīna sēvācihnānidēhēna- rakasthitānām ॥ 17 ॥ Meaning - Extreme anger, bitter words, poverty, hatred among one's own people, association with lowly people, service to the familyless (Persons withlower moral values or no moral values should be considered as kulahina), these signs remain in the bodies of the residents of hell. 17 ॥ गम्यतेयदिमृगेन्द्रमदिरंलक्ष्यते करिकपोलमौ-क्तिकम् ॥ जंबुकालयगतेचप्राप्यते वत्सुपुच्छ-खरचर्मखण्डनम् ॥ १८ ॥ अर्थ - यदि, कोई सिंह के गुहा में जा पडे तो उस को हाथी के कपोल के मोती मिलते है। और सियार के स्थान में जाने पर बछवे की पूंछ और गदहे के चमडे का टुकडा मिलता है ॥ १८ ॥ gamyatēyadimr̥gēndramadiraṁlakṣyatē karikapōlamau-ktikam ॥ jaṁbukālayagatēcaprāpyatē vatsupuccha-kharacarmakhaṇḍanam ॥ 18 ॥ Meaning - If someone goes into a lion's cave, he finds pearls from an elephant's skull. And on going to the jackal's place, one finds a calf's tail and a piece of donkey's skin. 18 ॥ शुनःपुच्छमिवव्यर्थं जीवितंविद्ययाविना ॥ नगुह्यगोपनेशक्तंनचदंशनिवारणे ॥ १९॥ कुत्ती की पूंछ के समान विद्या विना जीना व्यर्थ है। कुत्ती की पूंछ गोप्यइन्द्रियको ढांप नहीं सकती है न मच्छर आदि जीवों को उडा सकती है ॥ १६ ॥ śunaḥpucchamivavyarthaṁ jīvitaṁvidyayāvinā ॥ naguhyagōpanēśaktaṁnacadaṁśanivāraṇē ॥ 19॥ Like a (female dog) dog's tail, living without knowledge is meaningless. A dog's tail cannot cover the senses nor can it drive away mosquitoes etc. 16 ॥ वाचांशौचंचमनसःशौचमिन्द्रियनिग्रहः ॥ सर्वभूतदयाशौचमेतच्छो चंपरार्थिनाम् ॥२०॥ अर्थ - वचन की शुद्धि, मन की शुद्धि, इन्द्रियों का संयम, सब जीवों पर दया और पवित्रता ये परार्थियों में होता है॥ २० ॥ vācāṁśaucaṁcamanasaḥśaucamindriyanigrahaḥ ॥ sarvabhūtadayāśaucamētacchō caṁparārthinām ॥20॥ Meaning - Purity of speech, purity of mind, control of senses, kindness to all living beings and purity are found in the philanthropists. 20 ॥ पुष्पेगंधंतिलेतैलंकाष्ठेग्निपयोसघृतम् ॥ इक्षौगुडंतथादेहेपश्यात्मानं विवेकताः॥२१॥ अर्थ - फूल में गन्ध, तिल में तेल, काष्ठ में आग दूध में घी, ऊष में गुड जैसे, वैसे ही देह में आत्मा को विचार से देखो ॥२१॥ puṣpēgaṁdhaṁtilētailaṁkāṣṭhēgnipayōsaghr̥tam ॥ ikṣauguḍaṁtathādēhēpaśyātmānaṁ vivēkatāḥ॥21॥ Meaning - Just as fragrance is in flowers, oil is in sesame seeds, fire is in wood, ghee is in milk, jaggery is in joy, similarly look at the soul in the body with your thoughts. ॥21॥ इत्ति सप्तमोऽध्याय ॥ ७ ॥ itti saptamō’dhyāya ॥ 7 ॥
चाणक्य की प्रसिद्धि :
ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति, चाणक्य नीति की 10 बातें, चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें, चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है ।
चाणक्य का कालातीत प्रभाव :
हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।
About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :
चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है। राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।
- Navagraha Stotram (नवग्रह स्तोत्रम्)नवग्रह स्तोत्र (Navagraha Stotram) – अर्थ और लाभ नवग्रह स्तोत्र (Navagraha Stotram) – अर्थ, महत्त्व और संपूर्ण पाठ नवग्रह स्तोत्र (Navagraha Stotram)… Read more: Navagraha Stotram (नवग्रह स्तोत्रम्)
- शिव पंचाक्षर स्तोत्र (Shiv Panchakshar Stotra)शिव पंचाक्षर स्तोत्र – अर्थ और बोल | Shiv Panchakshar Stotra Lyrics & Meaning in Hindi शिव पंचाक्षर स्तोत्र (Shiv Panchakshar Stotra)… Read more: शिव पंचाक्षर स्तोत्र (Shiv Panchakshar Stotra)
- सिद्ध कुंजिका स्तोत्र (Siddha Kunjika Stotram)सिद्ध कुंजिका स्तोत्रम् (Siddha Kunjika Stotram) – अर्थ और महत्व सिद्ध कुंजिका स्तोत्रम्: दुर्गा सप्तशती की गुप्त कुंजी कलाकार/स्रोत: परंपरागत (रुद्रयामल तन्त्र)… Read more: सिद्ध कुंजिका स्तोत्र (Siddha Kunjika Stotram)
- श्रीरामरक्षास्तोत्रम् (Ram Raksha Stotra)श्रीरामरक्षास्तोत्रम् (Ram Raksha Stotra) – अर्थ और महात्म्य श्रीरामरक्षास्तोत्रम् (Ram Raksha Stotra): सुरक्षा और भक्ति का दिव्य कवच रचियता: बुधकौशिक ऋषि (Budha… Read more: श्रीरामरक्षास्तोत्रम् (Ram Raksha Stotra)
- Jai Ambe Gauri (जय अम्बे गौरी)By Anuradha Paudwal (अनुराधा पौडवाल) जय अम्बे गौरी आरती – अनुराधा पौडवाल | Jai Ambe Gauri Lyrics & Meaning जय अम्बे गौरी आरती:… Read more: Jai Ambe Gauri (जय अम्बे गौरी)
- सैयारा (Saiyaara) – 2025सैयारा (Saiyaara) – 2025 Lyrics & Meaning सैयारा (Saiyaara) – 2025: गीत, अर्थ और विश्लेषण कलाकार: फहीम अब्दुल्ला, तनिष्क बागची, अर्सलान निज़ामी… Read more: सैयारा (Saiyaara) – 2025
- Ye Tune Kya Kiya LyricsYe Tune Kya Kiya Lyrics Ishq woh balaa haiIshq woh balaa haiJisko chhua jisne woh jalaa hai Dil se hota hai shuruDil… Read more: Ye Tune Kya Kiya Lyrics
- Jo Tum Mere HoSong by Anuv Jain ‧ 2024 JO TUM MERE HO Lyrics हैरान हूँ कि कुछ भी न मांगूं कभी मैं जो तुम… Read more: Jo Tum Mere Ho
Leave a Reply