By हरिहरन (Hariharan)
बजरंग बाण (Bajrang Baan) – हरिहरन
परिचय (About)
बजरंग बाण भगवान हनुमान की अमोघ शक्ति का प्रतीक है। हरिहरन की मखमली और गंभीर आवाज़ में गाया गया यह भजन न केवल कानों को प्रिय लगता है, बल्कि आत्मा को भी झकझोर देता है। यह पाठ विशेष रूप से तब किया जाता है जब कोई भक्त घोर संकट, भय या स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा हो। ‘बाण’ का अर्थ है तीर, जो अपने लक्ष्य को भेद कर ही रहता है; इसी प्रकार यह पाठ हनुमान जी की कृपा सुनिश्चित करता है।
इतिहास (History)
इस स्तोत्र की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी। किंवदंतियों के अनुसार, एक बार तुलसीदास जी को काशी में बहुत ही पीड़ादायक फोड़े या वात रोग ने जकड़ लिया था। औषधियों के विफल होने पर, उन्होंने हनुमान जी का आह्वान करते हुए बजरंग बाण की रचना की। इसमें उन्होंने हनुमान जी को श्रीराम की सौगंध दी, जिसके फलस्वरूप वे तुरंत स्वस्थ हो गए। हरिहरन का यह संस्करण 90 के दशक में गुलशन कुमार द्वारा प्रस्तुत किया गया था और आज भी घर-घर में गूंजता है।
बजरंग बाण लिरिक्स (Bajrang Baan Lyrics in Hindi)
भावार्थ और विश्लेषण (Meaning Analysis)
बजरंग बाण का प्रत्येक शब्द शक्ति से ओत-प्रोत है।
- भक्त की व्याकुलता: भक्त कहता है कि मैं पूजा-पाठ के नियम नहीं जानता (पूजा जप तप नेम अचारा…), मैं केवल आपका दास हूँ।
- श्रीराम की शपथ: इस पाठ का सबसे शक्तिशाली पहलू वह है जहाँ भक्त हनुमान जी को ‘राम दुहाई’ (राम की कसम) देता है। यह हनुमान जी को विवश करता है कि वे तुरंत अपने भक्त की रक्षा करें।
- बीज मंत्र: इसमें ‘ॐ चं चं चं चं’ और ‘ॐ हं हं’ जैसे बीज मंत्रों का उपयोग किया गया है, जो ध्वनि विज्ञान (Sound Therapy) के अनुसार वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
रोचक तथ्य (Trivia)
- रोग निवारक: मान्यता है कि असाध्य रोगों में, विशेषकर शारीरिक पीड़ा में, बजरंग बाण का पाठ अचूक होता है।
- तांत्रिक महत्व: इसमें प्रयुक्त बीज मंत्र इसे सामान्य भजन से अलग एक तांत्रिक स्तोत्र का दर्जा देते हैं।
- हरिहरन का प्रभाव: हरिहरन ने इसे भारतीय शास्त्रीय संगीत की ‘ध्रुपद’ अंग जैसी गंभीरता के साथ गाया है, जो इसे अन्य फिल्मी भजनों से अलग करता है।
- सावधानी: कई विद्वान मानते हैं कि इसमें भगवान को शपथ दी जाती है, इसलिए इसका पाठ तभी करना चाहिए जब आप भारी संकट में हों।
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