चाणक्य नीति दर्पण मूलत: संस्कृत (Sanskrit) में संस्कृत सुभाषितों के रूप में, काव्यात्मक एवं श्लोकों के रूप में लिखा हुआ ग्रंथ है। इसके रचनाकार आचार्य चाणक्य हैं। उनके ये संस्कृत श्लोक चाणक्य नीति के नाम से संसार भर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर यह श्लोक देवनागरी लिपि एवं रोमन लिपि में भी दिए गए हैं एवं उनके अर्थ हिंदी देवनागरी एवं अंग्रेजी में रोमन लिपि में भी दिये गये हैं। जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय जो देवनागरी से परिचित नहीं हैं सनातन ग्रंथों के ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।
अथद्वितीयोऽध्यायः ॥ 2 ॥
athadvitīyō’dhyāyaḥ ॥ 2 ॥
मातारिपुः पिताशत्रुबीलोयाभ्यांनपाठ्यते ॥ सभामध्येनशो अंतर्हसमध्येबकोयथा ॥ ११॥ अर्थ - वह माता शत्रु और पिता बैरी है जिसने अपने बालक को शिक्षा न दी हो, क्योंकि वे सभा के बीच ऐसे शोभते हैं, जैसे हंसों के बीच बगुला ॥ ११ ॥ mātāripuḥ pitāśatrubīlōyābhyāṁnapāṭhyatē ॥ sabhāmadhyēnaśō aṁtarhasamadhyēbakōyathā ॥ 11॥ Meaning - He is the enemy of the mother and the enemy of the father who has not taught his child, because he is as graceful among the gathering as a heron among the swans. ॥ 11 ॥ लालनाद्बहवोदोषास्ताडनाद्वद्दवेोगुणाः ॥ तस्मात्पुत्रंचशिष्यं चताडयेन्नतुलालयेत्॥१२॥ अर्थ - दुलारने से (आवश्यकता से अधिक) बहुत दोष होते हैं और दंड देने से बहुत गुण इस हेतु पुत्र और शिष्य को दण्ड देना उचित है,केवल लालना नहीं ॥ १२ ॥ lālanādbahavōdōṣāstāḍanādvaddavēōguṇāḥ ॥ tasmātputraṁcaśiṣyaṁ catāḍayēnnatulālayēt॥12॥ Meaning - There are many vices in loving and many virtues in punishment, therefore it is appropriate to punish a son and a disciple, not only to love them. 12 ॥ श्लोकेन वा तदर्धेन तदर्धार्धाक्षरेण वा । अबन्ध्यं दिवसं कुर्याद्दानाध्ययनकर्मभिः ॥ ०२-१३ अर्थ - श्लोक या श्लोक के आधे भाग को अथवा आधे में से आधे को प्रतिदिन पढना उचित है। क्योंकि दान, अध्ययन आदि कर्मों से दिन को सार्थक करना चाहिये ॥ १३ ॥ ślōkēna vā tadardhēna tadardhārdhākṣarēṇa vā | abandhyaṁ divasaṁ kuryāddānādhyayanakarmabhiḥ ॥ 02-13 ॥ Meaning - It is appropriate to read a verse or half of a verse or half of the verses every day. Because the day should be made meaningful by activities like charity, study etc. 13 ॥ कान्तावियोगः स्वजनापमानं ऋणस्य शेषं कुनृपस्य सेवा । दारिद्र्यभावाद्विमुखं च मित्रं विनाग्निना पञ्च दहन्ति कायम् ॥कायम् ०२-१४ अर्थ - स्त्री का बिरह, अपने जनो सें अनादर, युद्ध करके बचा शत्रु, कुत्सित राजा की सेवा, दरिद्रता और अविवेकियों की सभा ये बिना आग ही शरीर को जलाते हैं १४ ॥ kāntāviyōgaḥ svajanāpamānaṁ r̥ṇasya śēṣaṁ kunr̥pasya sēvā | dāridryabhāvādvimukhaṁ ca mitraṁ vināgninā pañca dahanti kāyam ॥kāyam 02-14 Meaning - Separation from wife, disrespect from one's own people, enemy saved from war, service to an evil king, poverty and gathering of unreasonable people, these burn the body without fire. 14 ॥ नदीतीरेचयेवृक्षाःपरगेहेषुकामिनि ॥ मंत्रिहीनाश्चराजानःशीघ्रनश्यंत्यसंशयम्॥१५॥ अर्थ - नदी के तीर के वृक्ष, दूसरे के घर में (अनुचित रीति से) जाने वाली स्त्री, मंत्री रहित राजा, निश्चय ही ये शीघ्र ही नष्ट हो जाते हैं ॥ १५ ॥ nadītīrēcayēvr̥kṣāḥparagēhēṣukāmini ॥ maṁtrihīnāścarājānaḥśīghranaśyaṁtyasaṁśayam॥15॥ Meaning - Trees on the banks of the river, a woman going to someone else's house (improperly), a king without a minister, surely these are soon destroyed. ॥ १५ ॥
ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण, रचनाकार – आचार्य चाणक्य, द्वितीय अध्याय – श्लोक- 11-15
चाणक्य की प्रसिद्धि :
ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति, चाणक्य नीति की 10 बातें, चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें, चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है ।
चाणक्य का कालातीत प्रभाव :
हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।
About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :
चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है। राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।
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