अथ प्रथमोऽध्याय:
atha prathamō’dhyāya:
आपदर्थेधनंरक्षेच्छ्रीमतश्चाकमापदः ॥ कदाचिच्चलितालक्ष्मीः संचितोपिविनश्यति ॥७॥ अर्थ - विपत्ति निवारण के लिये धन की रक्षा करना उचित है, क्योंकि श्रीमानों को भी आपत्ति आती है। हाँ कदाचित् दैवयोग और चंचल होने से संचित लक्ष्मी भी नष्ट हो जाती है ॥ ७ ॥ āpadarthedhanaṃrakṣecchrīmataścākamāpadaḥ ॥ kadāciccalitālakṣmīḥ saṃcitopivinaśyati ॥7॥ Meaning - It is appropriate to save money to prevent calamities, because even gentlemen have objections. Yes, perhaps due to divine combination and fickleness the accumulated Lakshmi also gets destroyed. 7 ॥ यस्मिन्देशेनसंमानोनवृत्तिर्नचबांधवः ।। नचविद्यागमोप्यस्तिवासंतत्रनकारयेत् ॥८॥ अर्थ - जिस देश में न आदर मिले, न जीविका ही प्राप्त हो, न अपना कोई बन्धु वहाँ हो, न ही विद्या का लाभ हो पाये ऐसे स्थान पर वास नहीं करना चाहिये॥८॥ yasmindeśenasaṃmānonavṛttirnacabāṃdhavaḥ ॥ nacavidyāgamopyastivāsaṃtatranakārayet ॥8॥ Meaning - One should not reside in a country where one does not get respect, one does not get livelihood, one does not have any friend there, nor one can get the benefit of education.॥8॥ धनिकःश्रोत्रियोग जानदवैिद्यस्तुपंचमः ॥ पंचयत्रन विद्यतेनतत्रदिवसंवसेत् ॥९॥ अर्थ - धनिक अर्थात समृद्ध व्यक्ति, वेद का ज्ञाता-विद्वान, राजा, नदी, और पांचवाँ वैद्य (चिकित्सक या डॉक्टर) ये पांँचों जहाँ विद्यमान नहीं हैं वहाँ एक दिन भी वास नहीं करना चाहिये ॥९॥ dhanikaḥśrōtriyōga jānadavaiidyastupaṁcamaḥ ॥ paṁcayatrana vidyatēnatatradivasaṁvasēt ॥9॥ Meaning - One should not reside even for a day where a rich person, a scholar of Vedas, a king, a river, and the fifth Vaidya (physician or doctor) are not present.
ग्रन्थ का नाम : चाणक्यनीतिदर्पण, रचनाकार – आचार्य चाणक्य, प्रथम अध्याय – श्लोक-07-09
चाणक्य की प्रसिद्धि :
ये संस्कृत श्लोक आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित हैं। उनका नाम कौटिल्य एवं विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनकी रचनाएँ Chanakya सूत्र, chanakya niti, chanakya ni pothi, chanakya quotes, chanakya niti in hindi, chanakya quotes in hindi, चाणक्य, चाणक्य नीति, चाणक्य नीति की 10 बातें, चाणक्य नीति की बातें, चाणक्य के कड़वे वचन, चाणक्य नीति स्त्री, चाणक्य नीति की 100 बातें, चाणक्य विचार इन हिंदी, चाणक्य नीति सुविचार, चाणक्य नीति जीवन जीने की, सुविचार चाणक्य के कड़वे वचन, sanskrit shlok, shlok,sanskrit, sanskrit shlok,sanskrit quotes,shlok in sanskrit, sanskrit thought, sanskrit slokas,संस्कृत श्लोक,श्लोक,छोटे संस्कृत श्लोक, आदि के रूप में चर्चित एवं प्रसिद्ध है ।
चाणक्य का कालातीत प्रभाव :
हजारों वर्षों के उपरांत भी उनमें वही ताजगी और उपयोगिता है। अतः वे आज भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं जितने वे तब थे जब वे लिखे गये थे। संस्कृत में रचित होने के कारण उनमें कालांतर के प्रभाव को स्पष्टतः नहीं देखा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा का सर्वश्रेष्ठ व्याकरण उसके अस्तित्व एवं गुणवत्ता के साथ ही उसके प्रभाव कि भी सुरक्षा करता है। ये अत्यंत ज्ञानवर्धक, पठनीय एवं माननीय हैं। ये जीवन के अनेक चौराहों पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं जब सब ओर अंधकार छा जाने की प्रतीति होती है।
About Chanakya (चाणक्य के बारे में) :
चाणक्य का प्रभाव प्राचीन भारत से परे तक फैला हुआ है, क्योंकि शासन कला और शासन पर उनके विचारों का दुनिया भर के विद्वानों और नीति निर्माताओं द्वारा अध्ययन और सम्मान किया जाता है। राजनीति के प्रति उनका व्यावहारिक दृष्टिकोण और राज्य और उसके नागरिकों के कल्याण पर उनका जोर उन्हें एक कालातीत व्यक्ति बनाता है जिनकी बुद्धि समय और स्थान की सीमाओं से परे है।
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